पूर्व मध्य रेल द्वारा यात्रियों की यात्रा को और ज्यादा सुरक्षित एवं आरामदायक बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए रक्सौल और हावड़ा के मध्य चलने वाली गाड़ी 13044/13043 रक्सौल-हावड़ा-रक्सौल एक्सप्रेस का परिचालन आईसीएफ कोच के बदले अत्याधुनिक एलएचबी कोच से किया जायेगा. यह बदलाव रक्सौल से 5 अप्रैल से व हावड़ा से 9 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगा.
एलएचबी रेक में परिवर्तन के उपरांत इस ट्रेन में द्वितीय वातानुकूलित श्रेणी का 1, तृतीय वातानुकूलित श्रेणी के 2, शयनयान श्रेणी के 9, साधारण श्रेणी के 4 कोच व एसएलआर के 2 कोच सहित कुल 18 कोच होंगे. सीपीआरओ सरस्वती चंद्र ने बताया कि एलएचबी कोच यात्रियों को अपेक्षाकृत अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान कराता है.
कोचों में आधुनिक सीबीसी कपलिंग लगे होने से संरक्षा में वृद्धि होती है
स्टेनलेस स्टील से निर्मित बेहतर आंतरिक सज्जा युक्त उच्च गति क्षमता वाले अत्याधुनिक एलएचबी कोच आईसीएफ कोच की तुलना में वजन में हल्के और मजबूत होते हैं. कोचों में आधुनिक सीबीसी कपलिंग लगे होने से संरक्षा में वृद्धि होती है. एंटी क्लाइम्बिंग विशेषताएं दुर्घटनाओं के दौरान उन्हें एक-दूसरे पर चढ़ने से रोकती हैं. कोच बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम व सस्पेंशन के साथ-साथ बेहतर आंतरिक सज्जा व शौचालय युक्त होते हैं. फलस्वरूप एलएचबी कोच युक्त ट्रेनों से यात्रा अपेक्षाकृत अधिक संरक्षित, सुरक्षित व आरामदायक होती है.
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