समस्तीपुर : किसान को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक कीट प्रबंधन व फसलों की बीमारियों को पहचानने में मदद करेगा। किसान कीट प्रबंधन के लिये एनपीएसएस एप का उपयोग करेंगे। एनपीएसएस एप से किसान आसानी से पता लगा सकेंगे कि किस प्रकार की खेती से अच्छा मुनाफा होगा और किस समय कौनसी खेती करना सही रहेगा। यह सभी जानकारियां एआई तकनीक का उपयोग कर प्राप्त की जा सकती हैं।
इसके अलावा, यह ऐप कीटों की सघनता के आधार पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह भी देगा। इसमें एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन पद्धति और संस्तुत कीटनाशकों की जानकारी भी मिलेगी। किसान अपने मोबाइल पर ही यह जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। विभाग के द्वारा इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनके मोबाइल में एप को डाउनलोड कराया जा रहा है। विभाग के द्वारा सभी प्रखंड के सहायक तकनीकी प्रबंधक एवं प्रगतिशील किसानों को इसके लिये प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनपीएसएस एप के उपयोग एवं महत्व के विषय में आईपीएम के महत्व एवं आईपीएम के सिद्धांत एवं उसके विभिन्न आयामों के बारे में, ट्राईकोडर्मा से बीज उपचार का प्रदर्शन, कीटनाशकों के सुरक्षित एवं संतुलित इस्तेमाल, मनुष्य पर होने वाले कीटनाशकों का दुष्प्रभाव, कीटनाशकों के लेवल एवं कलर कोड, यांत्रिक विधियों जैसे येलो स्टिकी, ब्लू स्टीकी, फेरो मैन ट्रैप, फल मक्खी जाल, लाइट ट्रैप के उपयोग के बारे में और जैविक विधि के इस्तेमाल, मित्र एवं शत्रु कीटों की पहचान, नीम आधारित एवं अन्य वानस्पतिक कीटनाशक के महत्व के बारे में तथा विभिन्न फसलों में लगने वाले कीट व व्याधि की पहचान के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।
एनपीएसएस एप के नोडल पदाधिकारी सह सहायक निदेशक पौधा संरक्षण विभाग राजीव कुमार रजक ने बताया कि यह एप किसानों के लिये बहुत ही उपयोगी है। इस ऐप का उपयोग किसान, कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, आईसीएआर और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी भी कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह ऐप 61 फसलों के प्रमुख कीटों और बीमारियों की पहचान करने में सक्षम है। फिलहाल, 15 प्रमुख फसलों जैसे कपास, धान, गेहूं, मक्का, अरहर, मूंग, सोयाबीन, गन्ना, बैंगन, टमाटर, सेब, केला, अंगूर, अनार और मिर्ची की निगरानी के लिए उपलब्ध है. जल्द ही अन्य फसलों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
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