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समस्तीपुर: महज चार धूर जमीन के लिए सगे चाचा ने खेली खू’न की होली, बुझ गया घर का इकलौता चिराग

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समस्तीपुर/पटोरी :- महज चार धूर जमीन के लिए सगे चाचा ने खून की होली खेल ली और रिश्ते को कलंकित कर दिया। चार धूर जमीन के लिए उसने न सिर्फ भतीजे की हत्या कर डाली बल्कि एक भाई को भी पीटकर घायल कर दिया है। मामला पटोरी थाना क्षेत्र के बांदे गांव का है। मंगलवार की काली रात धर्मेंद्र के लिए काल बनकर आयी थी। यह रात उसके पूरे परिवार पर शामत बनकर टूट पड़ी।

महज चार धूर भूमि ने रिश्ते को दागदार बना दिया। हत्या के बाद दरवाजे पर रखे गए धर्मेंद्र के शव से लिपटकर उसकी पत्नी रूबी, पुत्र आर्यन और पुत्री सोनाली जब रो रहे थे तो वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू टपक पड़े। बेटे की मौत के बाद मां राम परी देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। धर्मेंद्र के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। घर का सबसे बड़ा कमाऊ सदस्य धर्मेंद्र ही था। वह पटोरी के एक पानी के प्लांट में दैनिक मजदूरी करता था। इसी जीविकोपार्जन से पूरा परिवार चलता था।

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पिता की मौत के बाद उसकी मां ने अपने देवर अर्थात धर्मेंद्र के चाचा वशिष्ठ नारायण सिंह से शादी कर ली थी। इस भूमि विवाद में धर्मेंद्र का सौतेले पिता भी गंभीर रूप से घायल हैं। जमीन का यह विवाद आज से नहीं चल चला आ रहा है। पांच वर्ष पहले भी इसी भूमि को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। दोनों पक्षों में मारपीट भी हुई थी और इसका सागा चाचा रामभरोस सिंह पहले भी मारपीट के केस में जेल जा चुका था। भूमि को लेकर कई बार पंचायत बैठाई गई। फिर भी मामले का निदान नहीं हो सका।

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अब इसी जमीन को लेकर धर्मेंद्र की हत्या कर दी गई। काफी कम भूमि में ही ये लोग खेती करते हैं। उसके चाचा वशिष्ठ नारायण सब्जी की खेती कर उसे बाजार में ले जाकर बेच देते थे। विवादित भूमि घर के समीप ही है। मंगलवार को भी वह बाजार गए थे। उनके एक भतीजे ने इसी विवाद को लेकर बाजार में ही उनकी पिटाई कर दी थी। जब घर लौटे तो देर शाम खून की नदियां ही बह गई।

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धर्मेंद्र अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें भी हैं, जिसकी शादी हो चुकी है। वह काफी जिम्मेदार और ईमानदारी पूर्वक काम करने वाला व्यक्ति था। धर्मेंद्र न सिर्फ परिवार के लिए ही प्यारा था बल्कि उसे समाज के लोग भी काफी चाहते थे। सामाजिक कार्यों में भी वह खुलकर लोगों की मदद करता था और एक दूसरे के सुख- दुख में शरीक होता था। इस भूमि को लेकर दोनों पक्ष एक दूसरे पर कई प्रकार के आरोप लगाते थे और झूठे केस में फंसाने की कोशिश भी किया करते थे। जब सभी प्रपंच नाकाम हुए तो हत्यारों ने उसकी हत्या कर डाली।

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धर्मेंद्र के पिता स्व. श्रीचरण सिंह चार भाई थे, उनकी मौत कम उम्र में ही हो गई। नतीजा यह हुआ कि उनके भाई वशिष्ठ नारायण सिंह तथा धर्मेंद्र का झंझट उनके बाकी दो चाचा राम भरोस सिंह तथा प्रेमचंद सिंह से इसी भूमि को लेकर हमेशा होता रहता था। मंगलवार की रात जब वशिष्ठ नारायण सिंह दिन में हुई पिटाई के बाद लौट रहे थे तो दुर्गा स्थान पर उनका भतीजा धर्मेंद्र भी आ गया। विरोधी दल पूर्व से ही तैयार और घात लगाए बैठा था।

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जैसे ये लोग आए रात 9 बजे इन दोनों पर लगभग 10-12 की संख्या में विपक्षी दलों ने हमला बोल दिया। सबसे बड़ी बात यह कि दुर्गा स्थान के समीप कई लोग रहते हैं, किंतु ठंड में अंधेरा होने से लोग जब तक मामला समझ पाते तब तक तो हत्यारों ने अपना काम पूरा कर लिया और फरार हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है। इस मातमी सन्नाटे में रह रह कर चीखने की आवाज आ रही है। पुलिस एहतियातन घटनास्थल पर कैंप कर रही है।

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