समस्तीपुर :- कड़ाके की ठंड व शीतलहर से मवेशी भी प्रभावित है। मवेशी पालकों को अपने दुधारू मवेशियों का बीमार पड़ने व दूध कम होने की चिंता सता रही है। जिला गव्य विकास अधिकारी सुरेंद्र कुमार की मानें तो जिले में सामान्य दिनों में मिथिला डेयरी व अन्य डेयरियों से औसतन साढ़े दस लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। अभी इस कड़ाके की ठंड में दूध का उपादन तकरीबन डेढ़ लाख लीटर दूध कम होने की संभावना है। हर जगह से पूरा डाटा मिलने के बाद स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है।
पशुपालक राजकुमार राय, भुवनेश्वर यादव, चंदन राय, नंदन कुमार यादव ने बताया कि अभी दूध का उत्पादन पर बहुत कम असर पड़ा है। लगातार ठंड पड़ने व धूप नहीं निकलने पर परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में पशुओं को ठंड लगने पर वह बीमार हो सकता है। उन्हें ठंड से बचाना ही कारगर है।
पशु चिकित्सक प्रेमशंकर राय ने बताया कि ठंड से पशुओं को बचाने के लिए कारगर उपाय करना चाहिए। उन्हें खास कर अपने दुधारू मवेशियों को मिनरल मिक्सचर व संतुलित भोजन देना चाहिए। साफ पानी पिलाएं। खुली जगह में कम रखें। ढंड बढ़ने पर उन्हें ढंक कर उनके घर में ही रखें। अलाव भी जलाएं। हरा चारा के साथ सूखा चारा भी उन्हें दें। उनके पास साफ सफाई की व्यवस्था सही रहे। पशु चिकित्सक से सलाह लेकर रोग निरोधी टीका उन्हें लगाएं। कोशिश करें भोजन में उन्हें गुड़ दें ताकि उनका शरीर गर्म रहे। हालांकि ठंड को लेकर जिला पशुपालन अधिकारी के स्तर से अभी तक कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है।
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