समस्तीपुर/विद्यापतिनगर [पदमाकर सिंह लाला] :- मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति जी के स्मृति दिवस पर आयोजित ग्यारहवां विद्यापति राजकीय महोत्सव के दुसरे दिन रविवार को आयोजित कवि सम्मेलन फीका पड़ गया। विद्यापतिधाम रेलवे मैदान में आयोजित सम्मेलन में जहां जिला प्रशासन की ओर से उक्त कार्यक्रम की सफलता के लिए एक पखवाड़े से तैयारी चल रही थी।
वहीं अर्ध शतक की संख्या में स्थानीय स्वघोषित कवि कोविद के जिम्मे महोत्सव को यादगार बनाने का जिम्मा भी दिया। लेकिन दर्जन भर श्रोताओं की महफिल ने सभी तैयारियों की पोल खोल दी। स्थानीय श्रोताओं की मानें तो हमेशा से साल दर साल एक ही स्वनाम धनी रातों रात कवि बने कवियों से महोत्सव का मंच सजता रहा है नतीजतन श्रोताओं को रास नहीं आता है।
मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति जी ने जिस काव्य विधा की बदौलत दुनिया भर में मिथिलांचल का मान बढ़ाया था। उनकी समाधि भूमि पर आयोजित कवि सम्मेलन राजकीय महोत्सव के एक दशक पूर्ण होने के बाद भी अपनी व्यापकता को हासिल नहीं कर सका है। बताते हैं कि इस महोत्सव में वर्षों से अंगद की तरह पांव जमाएं तथाकथित कवि हमेशा ही महोत्सव के आयोजन की आहट पाते ही सक्रिय भूमिका में आ जाते हैं।
प्रसाशनिक तालमेल बिठा कर कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने वाले कवियों की सूची में अपने सगे संबंधियों का नाम समाहित करवा उन्हें रातों रात मंच प्रदान करते रहें हैं। रविवार को आयोजित सम्मेलन में मंच पर अव्यवस्था पोल खोलती दिखीं। अधिकांश कुर्सियां खाली रहीं। कवियों ने अपनी रचनाओं को खुद सुन वाही लूटी।
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