उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा(आरएलएम) में दरार की लकीरें झलकने लगी हैं। पार्टी के विधायक और उपेंद्र कुशवाहा के पुराने सहयोगी रामेश्वर महतो ने खुलकर बोलना शुरू कर दिया है। उन्होंने दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया जाना उपेंद्र कुशवाहा का आत्मघाती कदम बताया है और राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की है। नेतृत्व के निर्णय से नाराजगी के सवाल पर कहा है कि नाराज होना उनका अधिकार है। कहा है कि हमारे नेता परिवारवाद का विरोध करते थे एक झटके में पूरे परिवार को सेट कर लिया। अब यह सोच लें कि पार्टी बचाएंगे या परिवार। महतो फिलहाल दिल्ली में हैं। 25 दिसम्बर को अपने सुप्रीमो की लिट्टी चोखा पार्टी से दूर रहे और दिल्ली में बीजेपी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ दिखे।
सरकार गठन के बाद आरएलएम के किसी विधायक ने पहली बार जुबान खोली है। उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता देवी के अलावे पार्टी के तीन विधायक आनंद माधव, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह चुनाव जीतकर आए हैं। लेकिन 20 नवम्बर को मंत्री पद के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्ररास का नाम आगे कर दिया जिन्होंने चुनाव भी नहीं लड़ा था। कुशवाहा के इस फैसले से सब चौंक पड़े। तभी से अंदर-अंदर वगावत की आग सुलग रही थी। रामेश्वर कुशवाहा ने कहा कि 12 दिसम्बर को भी उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपनी भावना से अवगत करा दिया था।
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