समस्तीपुर : साइबर अपराध के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का तार समस्तीपुर से जुड़ने के मामले में सीबीआई ने अपनी जांच तेज कर दी है। सिम बॉक्स सेटअप के जरिए इंटरनेशनल वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल को लोकल वॉयस कॉल में बदलकर साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान ठगों से बरामद 264 सिम के धारकों की तलाश जारी है। बताया गया है कि समस्तीपुर जिले के भी कई लोगों के नाम पर फर्जी सीम कार्ड निकाले गये है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह गिरोह ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान भारत कार्ड बनाने के बहाने लोगों के फिंगरप्रिंट एकत्र करता था। इन फिंगर प्रिंट्स का उपयोग टेलीकॉम कंपनियों में कार्यरत सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट करने में किया जाता था। समस्तीपुर जिले के भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में इस गिरोह के कई सदस्यों ने लोगों के फिंगर प्रिंट लिये थे। बता दें कि रोसड़ा में बैठकर साइबर ठग अपने लैपटाप के माध्यम से एक्सचेंज को संचालित कर रहा था। फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का खुलासा तब हुआ जब अपर महानिदेशक दूरसंचार द्वारा अपने पत्रांक 3447967, दिनांक 19/08/2025 द्वारा आर्थिक अपराध इकाई को बताया गया।
बता दें की इस वर्ष सितंबर माह में रोसड़ा थाना क्षेत्र के ढट्ठा निवासी रामनारायण महतो के पुत्र अंजनी कुमार स्वतंत्र का नाम अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट के मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया था। इस कार्रवाई में रोसड़ा के ढ़ट्ठा निवासी शिवगुलाम महतो के पुत्र चंद्रबली सिंह, हसनपुर थाना क्षेत्र के दुधपुरा निवासी अरुण कुमार के पुत्र मुन्ना कुमार और पूर्णिया के बायसी चिरैया निवासी काफिफ शेख को गिरफ्तार किया गया था। इनमें मुन्ना कुमार पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) संचालक हैं। ईओयू को पटना से सूचना मिली थी कि समस्तीपुर, पूर्णिया और वाराणसी में सिम बाक्स के माध्यम से साइबर ठगी और डिजिटल फ्रॉड किए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में पता चला कि इन सिम बाक्स के जरिए हर महीने 1.2 लाख से अधिक फर्जी कॉल की जा रही हैं, जिसका इस्तेमाल निवेश फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसी गतिविधियों में किया जा रहा था।
चंद्रबली सिंह से पूछताछ में खुलासा हुआ था कि अंजनी कुमार स्वतंत्र ही इस गिरोह का मास्टरमाइंड था। अंजनी ने बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कई सिम बाक्स स्थापित किया और सभी का नियंत्रण उसी के पास था। पश्चिम बंगाल के सिलीगुडी में अंजनी कुमार द्वारा स्थापित पांच सिम बाक्स बंगाल एसटीएफ ने बरामद किए थे। ईओयू इस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चला रही है।
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