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सृजन घोटाला में पहली बार अफसर पर बड़ा ऐक्शन, रिटायर्ड बीडीओ की पेंशन जब्त

सृजन घोटाला में फंसे बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों पर सामान्य प्रशासन विभाग ने पहली बार बड़ी कार्रवाई की है। पीरपैंती में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के रूप में तैनात रहे चंद्रशेखर झा की दंड के रूप में पेंशन की राशि की शत-प्रतिशत कटौती का आदेश दिया गया है। यानी रिटायर्ड बीडीओ की पेंशन राशि सरकार ने जब्त कर ली है और उन्हें इस मद का पैसा नहीं मिलेगा।

चंद्रशेखर झा के कार्यकाल के दौरान कार्यालय के विभिन्न मदों के बैंक खातों से 4 करोड़ 52 लाख 88 हजार 246 रुपये की अवैध निकासी की गई। उनके कार्यकाल के दौरान बरती गई अनियमितता के लिए ही सीबीआई ने 2018 में केस दर्ज किया था, जिस पर विधि विभाग ने 4 अक्टूबर 2024 को अभियोजन की मंजूरी दी थी।

इसको लेकर विभाग द्वारा माना गया कि आरोपी अधिकारी झा द्वारा अपने कार्यकाल में उक्त जमा एवं निकासी के मामले का संज्ञान एवं नियमानुकूल कार्रवाई नहीं किया जाना लापरवाही का द्योतक है। विभाग ने सीबीआई की चार्जशीट रिपोर्ट को आधार बनाकर माना कि चंद्रशेखर झा ने लोक सेवक के रूप में कार्य करते हुए अपने पदस्थापन अवधि में अवैध रूप से एवं निजी लाभ के लिए विभिन्न चेकों द्वारा विभिन्न तिथियों को षड्यंत्र एवं जालसाजी के तहत करोड़ों रुपये सरकारी राशि को सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर, भागलपुर के खाते में हस्तांतरित किया था।

उनके द्वारा अपनी पत्नी (बबीता झा) के नाम से वसुंधरा, गाजियाबाद में बुक किए गए फ्लैट का भुगतान कराने, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर, भागलपुर में खाता खुलवाने, जबकि सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर, भागलपुर को बैंकिंग कारोबार की अनुज्ञप्ति प्राप्त नहीं थी, का साक्ष्य पाया गया है।

इस प्रकार कांड के अभियुक्त चन्द्रशेखर झा के विरुद्ध सरकारी राशि के दुर्विनियोग कर राशि के गबन का आरोप प्रमाणित होता है। विभाग ने आदेश की कॉपी सीबीआई को उपलब्ध करा दी है। कॉपी डीएम को भी भेजी गयी है। साथ ही आरोपित पदाधिकारी के धनबाद स्थित आवास पर भी पत्र भेजकर जानकारी दी गई है।

स्पष्टीकरण पर झूठी पाई गई झा की दलील

सीबीआई की जांच रिपोर्ट में चंद्रशेखर झा की भूमिका सामने आने पर 12 जुलाई 2025 को डीएम ने विभाग को आरोपपत्र उपलब्ध कराया। इसके बाद विभाग ने आरोपी से स्पष्टीकरण पूछा। स्पष्टीकरण में कहा कि बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43 (बी) में कार्रवाई चलाए बिना नियम-139 के तहत सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती है। साथ ही कहा कि प्रतिवेदित आरोप की अवधि कारण पूछने की तारीख से चार साल से अधिक पुराना है।

Avinash Roy

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