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समस्तीपुर सदर अस्पताल में इलाज के बजाय ओटीपी-पर्ची में उलझे मरीज, नेटवर्क नहीं रहने पर घंटों रहना पड़ता है इंतजार में

समस्तीपुर : सरकार की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को सुगम बनाने की मंशा सदर अस्पताल में मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। इलाज कराने पहुंचे मरीज और उनके परिजन ओटीपी और ऑनलाइन पर्ची बनवाने के चक्कर में परेशान हो रहे हैं। स्थिति यह है कि इलाज से पहले ही मरीज थक-हार कर बैठ जाते हैं। बताया जा रहा है कि ओटीपी सत्यापन और पर्ची ऑनलाइन कराने में काफी समय लग जाता है। इस बीच डॉक्टर देर से ओपीडी पहुंचते हैं और समय पूरी होते-होते निकल जाते हैं, जिससे कई मरीजों को बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ता है।

गौरतलब है कि सरकार ने मरीजों की सुविधा के लिए आभा और भव्या एप लॉन्च किया था, ताकि बार-बार पर्ची कटाने और लंबी कतारों से राहत मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले अशिक्षित और तकनीकी जानकारी से दूर मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। स्मार्टफोन, नेटवर्क और ओटीपी की प्रक्रिया उनके लिए बड़ी बाधा बन गई है। नतीजतन, मरीज इलाज की बजाय तकनीकी झंझटों में उलझे रहते हैं।

मरीजों के लिए पर्ची कटवाना जंग लड़ने के बराबर :

सदर अस्पताल में इलाज कराना अब मरीजों के लिए किसी जंग से कम नहीं रह गया है। वर्ष 2024 में स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को रजिस्ट्रेशन की लंबी लाइनों से राहत दिलाने के उद्देश्य से आभा ऐप लॉन्च किया था। वहीं, मरीजों की संपूर्ण मेडिकल हिस्ट्री को ऑनलाइन करने के लिए भव्या ऐप की शुरुआत की गई। लेकिन इन ऐप्स के लागू होने के बाद सदर अस्पताल के ओपीडी में पर्ची कटवाना मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। ओपीडी में इलाज कराने के लिए मरीज सुबह 8 बजे से 9 बजे के बीच अस्पताल पहुंचते हैं। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क और ओटीपी की समस्या शुरू हो जाती है। आभा ऐप के जरिए पर्ची कटवाने के लिए अब मोबाइल फोन अनिवार्य कर दिया गया है। बिना मोबाइल फोन के मरीज पर्ची नहीं कटा सकते।

एक मरीज को आभा पर रजिस्ट्रेशन में 10 से 15 मिनट लग जाता है। इसके लिये मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। हालांकि मरीजों की मदद के लिये दो कर्मियों की तैनाती ओपीडी के बाहर की गयी है। इसके बाद टोकन के लिये भी अलग से लाइन लगानी पड़ती है। इन सब के बाद डॉक्टर से दिखाने के लिये भी उनको कतार में रहना पड़ता है। अमूमन हर दिन ओपीडी में एक हजार मरीज पहुंच रहे है। इस दौरान नेटवर्क नहीं मिलने और ओटीपी नहीं आने पर मरीज बिना इलाज कराए लौटने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि आभा ऐप के बिना अब अस्पताल में पर्ची नहीं बनती है।

पर्ची के बाद भी खत्म नहीं होती परेशानी :

सिर्फ पर्ची कटवाना ही नहीं, बल्कि इसके बाद वाइटल जांच और अन्य जांच को ऑनलाइन कराना भी मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आभा ऐप के माध्यम से पर्ची कटने के बाद मरीजों को अगर वाइटल जांच करानी होती है, जिसे भी ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य है। इसके बाद ही डाॅक्टर मरीज को देखते हैं। सबसे अधिक परेशानी इमरजेंसी मरीजों को हो रही है। इलाज के दौरान यदि डॉक्टर किसी प्रकार की जांच लिखते हैं, तो मरीजों को पहले उसे ऑनलाइन कराना पड़ता है। इसके बाद ही एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या पैथोलॉजी जांच संभव हो पाती है, जिससे इलाज में अनावश्यक देरी हो रही है।आभा आईडी और भव्या ऐप के कारण सदर अस्पताल में इलाज कराना और भी कठिन हो गया है। ओपीडी में अक्सर ऐसा होता है कि समय पूरा होने पर डॉक्टर तो चले जाते हैं, लेकिन अधिकांश मरीज पर्ची कटवाने और वाइटल जांच में ही फंसे रह जाते हैं।

शनिवार को मुसरीघरारी की सरिता देवी ने बताया कि वह सुबह 9 बजे पहुंची, लेकिन आभा आईडी पर ओटीपी आने में लगभग एक घंटा लग गया। इसके बाद पर्ची तो कट गई, लेकिन वाइटल जांच के लिए भी लंबी लाइन लगी थी। वाइटल जांच कराने में ही दोपहर 2 बज गए। जब तक जांच ऑनलाइन हुई, तब तक डॉक्टर जा चुके थे। अब मरीजों को शाम 3-4 बजे तक डॉक्टर के लौटने का इंतजार करना पड़ेगा। इस व्यवस्था से मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी है।

बयान :

विभागीय निर्देशानुसार आभा आईडी और भव्या एप से ही मरीजों का पर्ची काटा जा रहा है। हलांकि जिस मरीज के पास एंड्रायड मोबाइल नहीं होता है, उनका रजिस्ट्रेशन काउंटर पर कार्यरत कर्मियों द्वारा किया जाता है। हर दिन करीब 800 से 900 मरीज ओपीडी पहुंचते हैं, इस कारण थोड़ी भीड़ और देर होती है।

डॉ. गिरीश कुमार, डीएस, सदर अस्पताल समस्तीपुर

Avinash Roy

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