उम्मीदों की टूटी डोर तो ग्रामीणों ने चंदे से नदी में बना दिया पुल, समस्तीपुर के इस गांव में ढाई वर्ष पूर्व नदी के बेतरतीब उड़ाही के कारण ध्वस्त हो गया था पुल

समस्तीपुर/पटोरी : ढ़ाई वर्ष पूर्व जब नदी पुल धराशायी हुआ तो गांव वालों की जिंदगी मानो ठहर गई! नए नदी पुल के लिए सांसद, विधायक, प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों से वर्षों गुहार लगायी परंतु आश्वासनों के सिवा कुछ भी नहीं मिला। जब ग्रामीणों के उम्मीदों की डोर टूटी तो उन्होंने स्वयं एक बड़ा फैसला लिया और ग्रामीण चंदे से उसी स्थान पर लोहे का एक नया पुल खड़ा कर, दिखा दिया कि जब फैसला अडिग हो तो चुनौतियां भी धराशायी हो जाती हैं। ऐसी ही चुनौती के सपने को साकार कर दिखाया पटोरी प्रखंड के ताराधमौन के ग्रामीणों ने।
नदी के बेतरतीब उड़ाही के कारण ध्वस्त हो गया था 1994 में निर्मित पुल :
वर्ष 1994 में विनोबा भावे के सहकर्मी, भू-दानी नेता व पूर्व मुखिया भुवनेश्वर राय ने जन सहयोग से वाया नदी पर अवस्थित लोहसारी घाट पुल का निर्माण कराया था। मात्र 6 फीट चौड़े इस पुल में ईंट के कुल छह पिलर बनाए गए थे। इसके लिए ग्रामीणों से आर्थिक सहयोग लिया गया था। इसके अलावा तत्कालीन सांसद, विधायक एवं जवाहर रोजगार योजना से प्राप्त कुल 1.20 लाख रुपए की लागत से पुल का निर्माण हुआ था। वर्ष 2023 के जून माह में सिंचाई विभाग ने बेतरतीब तरीके से वाया नदी की उड़ाही की।

जुलाई माह में नदी का जलस्तर बढ़ा तो पुल के पिलर पर दबाव बढ़ गया। इससे पुल का दो पिलर टूट गया और पुल धराशायी हो गया। सच्चाई यह है कि पुल के धराशायी होने के बाद गांव का सड़क संपर्क बाधित हो गया और लोगों को काफी परेशानी होने लगी। पहले तो ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधि व अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाए। बार-बार आश्वासन मिला परंतु जब आश्वासन पूरा होता नहीं दिखा तो गांव के कुछ लोग सजग हुए और उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जो न सिर्फ उस गांव के लिए बल्कि आसपास के क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणा बन गई कि जब परिस्थितियां विपरीत हो तो घबराने की जगह उसे पूरा करने की चुनौती स्वीकार कर ली जाए। तारा धमौन में बना यह लोहे का पुल इस चुनौती को स्वीकार करने का ही परिणाम है।






