समस्तीपुर : जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 102 एंबुलेंस सेवा इन दिनों बुरी तरह प्रभावित है। मरीजों के परिजनों द्वारा लगातार शिकायत की जा रही है कि आपात स्थिति में 102 पर फोन लगाने पर घंटों तक कॉल नहीं लगती। कई बार कॉल बिजी आता है, तो कई बार फोन रिसीव होने के बाद खुद-ब-खुद कट जाता है। इस गंभीर मुद्दे को परखने के लिए Samastipur Town Media की टीम ने बुधवार की शाम खुद लगभग आधा दर्जन से अधिक बार 102 एंबुलेंस सेवा पर कॉल कर तथ्य जांचा।
नतीजा बिल्कुल वैसा ही मिला जैसा मरीज के परिजन आरोप लगाते रहे हैं। 102 एंबुलेंस का नंबर लगातार बिजी आया। Samastipur Town Media के द्वारा लगाये गये फोन के दौरान दो बार कॉल रिसीव भी हुआ, लेकिन दो-तीन सेकेंड तक खामोशी के बाद अचानक फोन कट गया। इससे साफ जाहिर होता है कि 102 एंबुलेंस सेवा का कॉल सेंटर या तो तकनीकी गड़बड़ी से जूझ रहा है या स्टाफ की कमी के कारण समय पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पा रही है। इसका खामियाजा आपात स्थिति में गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ता है। सोमवार को मोहिउद्दीननगर के आनंद गोलवा से मारपीट मामले में दिनेश राम एंबुलेंस ना मिलने पर आटो से सदर अस्पताल पहुंचे थे।
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार समस्तीपुर जिले के अलग-अलग अस्पतालों में कुल 68 एंबुलेंस तैनात हैं। वहीं, सदर अस्पताल में 8 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, जिनमें से दो मरचरी एंबुलेंस हैं। इसके बावजूद मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई बार एंबुलेंस समय पर न पहुंचने से मरीजों की स्थिति बिगड़ जाती है। सदर अस्पताल में मरीज का इलाज करवाने पहुंचे परिजन बताते हैं कि गंभीर मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचना कठिन हो जाता है। निजी एंबुलेंस महंगी होने के कारण सरकारी सेवा का विकल्प ही बचता है, लेकिन जब 102 पर कॉल ही नहीं लगता, तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। कभी-कभी टोटो या आटो से ही मरीज को अस्पताल लाने की स्थिति बन जाती है।
लगातार बिजी टोन और कॉल कटने की समस्या से यह स्पष्ट है कि कॉल सेंटर में या तो सिस्टम ओवरलोड है या फिर ऑपरेटर समय पर कॉल हैंडल नहीं कर पा रहे हैं। शहर से सट के रहने वाले का कहना है कि 102 जैसी सेवा का जवाब न देना सीधे-सीधे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। यह मामला बेहद गंभीर है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि 102 कॉल सेंटर की तकनीकी जांच कराए और आवश्यकतानुसार ऑपरेटरों की संख्या बढ़ाए, ताकि किसी भी मरीज को समय पर एंबुलेंस न मिलने की वजह से परेशानी का सामना न करना पड़े।
सदर अस्पताल परिसर के बाहर अक्सर निजी एंबुलेंस वाहनों की लाइन लगी रहती है। गोली लगने या गंभीर चोट जैसे मामलों में मरीज को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। जबकि सदर अस्पताल में दो-दो सर्जन मौजूद हैं और आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। बावजूद इसके दलालों व कुछ कर्मियों की मिलीभगत से रेफर का खेल लगातार जारी है। रेफर के दौरान परिजनों को अक्सर सरकारी के बजाय निजी एंबुलेंस करा दिया जाता है, जिसमें अस्पताल के कुछ कर्मी भी शामिल रहते है। सभी साथ मिलकर मरीज के परिजनों से मोटी रकम वसूलते हैं और चांदी काटते हैं।
सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध है। मरीजों को एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग एजेंसी की है। जिसका संचालन पटना से ही होता है। मरीज के परिजन टोल फ्री नंबर 102 पर कॉल कर एम्बुलेंस की डिमांड कर सकते हैं। अगर एम्बुलेंस मिलने में परेशानी है या फोन लगने के बाद रिस्पांस नहीं लिया जाता है तो परिजन लिखित शिकायत कर सकते हैं, जिसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
– डॉ. एसके चौधरी, सिविल सर्जन, समस्तीपुर
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