समस्तीपुर : जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की तमाम सख्ती के बावजूद जिले में अवैध तरीके से भ्रूण हत्या कर अवैध गर्भपात का घिनौना खेल बदस्तूर जारी है। नगर थाना क्षेत्र के काशीपुर वार्ड संख्या-34 में मंगलवार की सुबह कुड़े के ढेर पर एक नवजात का भ्रूण मिलने से सनसनी फैल गयी। इस दौरान वहां पहुंच नगर निगम के सफाईकर्मी शव को पन्नी में लपेटकर ट्रैक्टर पर ले। इससे पहले भी ठीक इसी जगह पर इसी वर्ष 2 मई को नवजात का भ्रूण मिल चुका हैं। स्थानीय विजय कुशवाहा ने बताया कि इलाके में कई अवैध अस्पताल बिना निगरानी के चल रहे हैं। मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंका जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी यहां नवजात शव और भ्रूण मिल चुके हैं। इलाके में खुलेआम मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। कभी नवजात बच्चे का शव तो कभी इंसानी अंग यहां कचरे में मिल रहा है। यह बेहद खतरनाक और अमानवीय है। बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों की जांच हो और मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निष्पादन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिससे आमलोगों को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
करीब तीन महीने के नवजात का भ्रूण मिलन के बाद लोग एक ही चर्चा कर रहे थे कि आखिर इस बेगुनाह का क्या कसूर है, जिसे दुनिया में आने से पहले ही बेरहमी से मार दिया गया। लोगों ने आशंका जतायी कि निजी नर्सिंग होम में अवैध गर्भपात का खेल चल रहा है। काफी पहले भी ऐसे कई मामले सामने आये हैं, जहां भ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात किये गये, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रही। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
शहर में कई नर्सिंग होम ऐसे हैं, जहां अवैध रूप से गर्भपात किए जाते हैं और जन्म से पहले ही मासूमों की सांसें छीन ली जाती है। वहां पर विजय कुशवाहा ने सवाल उठाया कि आखिर इस अवैध धंधे पर पूरी तरह लगाम कब लगेगा। ऐसे मामले सामने आने पर हमेशा निजी नर्सिंग होम की जांच व ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की बातें कही जाती है। लेकिन, समय के साथ ऐसे मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली सूची के अनुसार जिले भर में कुल 136 नर्सिंग होम और 78 अल्ट्रासाउंड ही पंजीकृत है। वहीं इस समय जिले भर में हजारों अवैध निजी क्लीनिक, जांच घर, लैब और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं, जिनमें इलाज के नाम पर भारी अनियमितताएं और लापरवाही हो रही है। एक कमरे या हाॅल के बाहर किसी डॉक्टर का बोर्ड लगा वहां कंपाउंडर के द्वारा ही इलाज कर दिया जा रहा है। इन अवैध नर्सिंग होम पर कोई कार्रवाई न होने के कारण संचालकों में भय का माहौल नहीं है।
मीडिया के माध्यम से यह बात संज्ञान में आया है। यह बेहद ही अमानवीय है। आसपास के नर्सिंग होमों की जांच करायी जाएगी और दोषी पाये गये नर्सिंग होम पर कार्रवाई भी की जाएगी।
एसके चौधरी, सिविल सर्जन, समस्तीपुर
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