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केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से ट्रेनिंग लेकर आप भी मशरूम की खेती से कमा सकते हैं लाखों का मुनाफा…

समस्तीपुर :- किसानों के लिए कम भूमि में अधिक आय प्राप्त करना बड़ी चुनौती है, ऐसे में किसान बागवानी फसलों की खेती जैसे सब्जी, फल एवं फूलों की खेती कर अधिक मुनाफ़ा कमा सकते हैं। किसानों को इन फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार द्वारा इन फसलों के उत्पादन पर सब्सिडी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

इस कड़ी में समस्तीपुर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा द्वारा समय-समय पर मशरूम उत्पादन के विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस प्रशिक्षण को लेकर अब समस्तीपुर समेत बिहार और अन्य राज्यों के लोग भी मशरूम से प्रोडक्ट बनाकर रोजगार को अपना रहे है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में मशरूम वैज्ञानिक डॉ. दयाराम सिंह युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मशरूम से बनने वाले प्रोडक्ट का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें आप भी प्रशिक्षण ले सकते हैं, क्योंकि यह ट्रेनिंग बेरोजगार लोगों को रोजगार से जोड़ने का मुख्य साधन है।

बता दें कि मशरूम एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसे लोग पहले सब्जी के तौर पर इस्तेमाल करते थे, परंतु अब मशरूम का अनेकों प्रकार की वैरायटी के प्रोडक्ट तैयार हो रहे है। जिसमें मशरूम का आटा, मशरूम का आचार, मशरूम का बिस्किट, मशरूम का नमकीन सहित अन्य प्रकार का प्रोडक्ट मशरूम शॉप तैयार किया जाता है। जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं, क्योंकि मशरूम से बनाया सामग्री लोगों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद है।

यहां जानिए कैसे होती है मशरूम की खेती, किसान कमाएंगे लाखों का मुनाफा :

अब मशरूम की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। पहले ये शहरी लोगों तक सीमित था, लेकिन अब ये मशरूम गांवों तक भी पहुंच गया है। आज बिना इसकी सब्जी के कोई भी प्रोग्राम पूरा नहीं माना जाता है। मशरूम के कई प्रकार होते हैं। सफेद बटर मशरूम, ऑयस्टर मशरूम, दूधिया मशरूम, पैडीस्ट्रा मशरूम और शिटाके मशरूम किसान उगा रहे हैं।

मशरूम की खेती का सबसे बड़ा फायदा तो ये है कि इसके लिए आपको मिट्टी की जरूरत नहीं, बल्कि प्लास्टिक के बड़े-बड़े बैगों, कंपोस्ट खाद, धान और गेहूं का भूसा इसे उगाने के लिए काफी है। अगर आप इसे उगाना चाहते हैं तो सबसे पहले छोटी जगह पर शेड़ लगाकर उसे लकड़ी और जाल से कवर कर के उदाहरण के तौर पर ऐसा कर के देख सकते हैं।

वहीं अगर आप इसे घर में उगाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक प्लास्टिक के बैग में कंपोस्ट खाद के साथ धान-गेहूं का भूसा मिलकार रख लें। फिर कंपोस्ट से भरे बैग में मशरूम के बीज को डालें और इसमें छोटे-छोट छेद कर दें, इन्हीं छेदों की मदद से मशरूम उगने के साथ ही बाहर निकल आएंगे। हालांकि, इस बात का आपको खास ध्यान रखना होगा कि बीज डालने के 15 दिनों बाद तक शेड में हवा ना लगे। फिर बुआई के 15 दिन बाद शेड में पंखे लगा दें और हवा का प्रवाह होने दें। इसके बाद 30-40 दिनों तक मशरूम की फसल को पकने दें।

Avinash Roy

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