सोशल मीडिया पर बैन पर नेपाल में भारी बवाल, संसद तक पहुंचे प्रदर्शनकारी; काठमांडू में सेना बहाल

नेपाल सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर बैन लगाने के निर्णय के खिलाफ भारी बवाल हो रहा है। ‘जेन–जी’ (युवा पीढ़ी) के बैनर तले युवाओं और छात्र राजधानी काठमांडू के अलावे विराटनगर की भी सड़कों पर उतर आए। इस दौरान प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। ये युवक और छात्र हाथ में झंडा और तख्ती लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी संसद में घुस गए। भीड़ को तितर-वितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। हालात को देखते हुए काठमांडू में कर्फ्यू लगाए जाने की सूचना है। हालात पर नियंत्रण के लिए सेना को उतार दिया गया है। संसद के साथ पीएम आवास और राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है।
नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया ऐप पर रोक लगा दी है। तर्क दिया गया है कि विदेश मीडिया नेपाल में अपना एजेंडा चला रही हैं। जो रजिस्टर्ड नहीं है उनपर रोक लगा दी गयी है। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया जा रहा है। सरकार के निर्णय के खिलाफ सुबह नौ बजे से हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर गए। प्रदर्शन में युवाओं ने नेपाली राष्ट्रीय झण्डा लहराते हुए राष्ट्रभक्ति गीत गाए। उनके हाथों में स्टॉप करप्शन, “स्वतन्त्र आवाज़ हमारा अधिकार है ” जैसे नारे लिखे तख्तियां थी। कई छात्र स्कूली ड्रेस में ही प्रदर्शन में शामिल हुए। उनकी एकसूत्री मांग है कि पहले बैन हटाया जाए उसके बाद बात होगी।

शान्तिपूर्ण आन्दोलन की घोषणा
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाया जाएए। युवाओं ने आन्दोलन को पूरी तरह शान्तिपूर्ण रखने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि न तोड़फोड़ होगी, न सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान, न ही किसी प्रकार की आगजनी। राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ताओं को भी प्रदर्शन से दूर रखने का निर्णय की बात कही ।विद्यार्थी कक्षाएँ छोड़कर पहुँचे कई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई समाप्त कर प्रदर्शन में शामिल हुए। मोरंग एसपी नारायण प्रसाद चिमरीया ने बताया कि विराटनगर में स्थिति नियंत्रण में हैं। जगह जगह पुलिस तैनात है।

पीएम ओली ने की अपील
नेपाल पीएम केपी शर्मा ओली ने युवाओं से शांति बहाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सोशल मीडिया का गलत उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। आजादी और स्वतंत्रता का मतलब गलत करना या गलत को बढ़ावा देना नहीं होता। किसी विचार से राष्ट्र को नुकसान पहुंचता है तो उस पर प्रतिबंध लगना भी जरूरी है।





