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‘संदेह पैदा करने की कोशिश, हर एक बात का होगा खुलासा’, फॉर्म 17 सी विवाद पर CEC राजीव कुमार

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सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर निर्वाचन आयोग को निर्देश देने से मना कर दिया, जिसमें आयोग को मतदान केंद्र-वार वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शनिवार को इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘सच्चाई स्वीकार कर ली गई है। संदेह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी। हम निश्चित रूप से सभी के साथ इस पर चर्चा करेंगे।’

कुमार ने देश की चुनावी प्रक्रिया की अखंडता से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। पोल पैनल चीफ ने कहा, ‘आखिर यहां पर क्या खेल है, संदेह क्यों पैदा किए जा रहे हैं? सवाल भी उठाए जा रहे हैं। हम एक दिन यह सब बताएंगे और दिखाएंगे कि कैसे लोगों को गुमराह किया गया है।’

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न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, ‘आखिर लोगों के मन में कैसे संदेह पैदा होता है? ऐसी बातें होने लगती हैं कि शायद ईवीएम ठीक से काम नहीं कर रही है, शायद मतदान सूची गलत है या शायद मतदान संख्याओं में हेरफेर किया गया है।’ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तो शुक्रवार को अपना जवाब दे दिया, लेकिन हम भी अपना जवाब देंगे और जरूर देंगे।

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बता दें कि मतदान के आंकड़ों में हेराफेरी किए जा सकने के तर्क को ईसी ने खारिज कर दिया। सूत्रों ने कहा कि एक बार फॉर्म 17सी उम्मीदवारों को सौंप दिया जाता है और ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम में जमा किया जाता है तो आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। फॉर्म 17सी में हरेक मतदान केंद्र पर डाले गए मतों का रिकॉर्ड होता है। यह उम्मीदवारों या उनके एजेंटों को तब दिया जाता है जब EVM को स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाने से पहले सील कर दिया जाता है।

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फॉर्म 17 सी को लेकर क्यों उठे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि अगर काल्पनिक स्थिति में प्रति मतदान केंद्र 4 उम्मीदवारों को फॉर्म 17सी दिया जाता है, तो भी 42 लाख से अधिक लोगों के पास यह दस्तावेज होगा क्योंकि 10.5 लाख मतदान केंद्र हैं। उन्होंने कहा, ‘विभिन्न राजनीतिक दलों के 42 लाख लोगों को कैसे मूर्ख बनाया जा सकता है और आंकड़ों में हेराफेरी की जा सकती है।’ आयोग ने चिंता व्यक्त की थी कि याचिकाकर्ता साफ मंशा से अदालतों में नहीं जा रहे हैं। आयोग ने कहा कि याचिकाकर्ता साजिश के सिद्धांतों के आधार पर मतदाताओं के मन में लगातार संदेह पैदा करने के एजेंडे के साथ अदालत के मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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