बिहार की राजनीति में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है. वैशाली जिले के राघोपुर में नाव पलटने की घटना के बाद केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की. यहां गौर करने वाली बात यह रही कि उनके सवाल राज्य की उसी एनडीए सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े थे, जिसके गठबंधन में उनकी पार्टी शामिल है.
वैशाली के रामपुर श्यामचंद गांव के पास नाव हादसा हुआ था, जिसमें 13 बच्चों की मौत हो गई. 14 अक्टूबर को चिराग पासवान ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने परिजनों का ढाढस बांधा. लेकिन दूसरी तरफ, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी की. चिराग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि हादसे में इस्तेमाल की गई नाव क्षतिग्रस्त थी.
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि सूर्यास्त के काफी देर बाद नाव का संचालन कैसे हो रहा था और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया. उन्होंने यह भी कहा था कि हादसे में प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक हुई है या नहीं, इसकी जांच की जाएगी. अगर प्रशासनिक स्तर पर या निजी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
चिराग पासवान के बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि उनकी पार्टी एनडीए की सहयोगी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसी स्थिति में जब कोई सहयोगी नेता सरकार की व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाता है, तो उसके बयान को प्रशासनिक जवाबदेही और गठबंधन के अंदर राजनीतिक संवाद, दोनों नजरिए से देखा जाता है.
जानकारों का कहना है कि किसी मुद्दे पर सरकार की आलोचना को सीधे गठबंधन में दरार या टकराव का संकेत मान लेना जल्दबाजी होगी. किसी घटना पर जवाबदेही मांगना और गठबंधन से अलग होने का फैसला करना दो अलग बातें हैं. चिराग के मामले में भी यही अंतर समझना जरूरी है. वैशाली हादसे पर उनका रुख प्रशासनिक कार्रवाई की मांग से जुड़ा है ना कि उनकी पार्टी या एनडीए के बीच किसी तरह के टकराव का.
यह पहली बार नहीं है जब चिराग पासवान ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाए हैं. इससे पहले जमुई-बांका समेत अन्य जिलों में लड़कियों के साथ हुए दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद भी उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे. यहां तक सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदा होने की बात तक कही थी.
चिराग पासवान ने कहा था, यह सच है कि आज की तारीख में बिहार में कोई सेफ फील नहीं महसूस कर पा रहा है. ये चिंता कोई छोटी चिंता नहीं है, मैं भी इस सरकार में सहयोगी हूं और इस सवाल से नहीं भाग सकता हूं. मैं खुद शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं. अभी जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही है, उसे कतई हल्के में नहीं ले सकते हैं.
पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं ने प्रदर्शन किया था. इस पर चिराग पासवान ने केंद्र सरकार का समर्थन किया था. उन्होंने कहा था, लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना सबका अधिकार है. लेकिन कुछ असामाजिक तत्व अपने पायदे के लिए भ्रम फैला रहे हैं, जिस पर कार्रवाई करनी जरुरी है. केंद्र सरकार से युवा नाराज नहीं हैं. जिस तरह से केंद्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी थी, उसका चिराग पासवान ने समर्थन किया था.
इस तरह से देखा जा सकता है कि चिराग पासवान सरकार के साथ भी हैं और सवाल भी उठा रहे हैं. लेकिन राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि चिराग पासवान ने पिछले दिनों में अगर सवाल खड़े किए हैं तो प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठाया है. कानून व्यवस्था हो या प्रशासनिक व्यवस्था, इन्हीं मुद्दों को उन्होंने उठाया. ऐसे में इसे राजनीतिक नजरिए से अभी देखना उचित नहीं होगा. ऐसे में अब आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की क्या गतिविधियां होती हैं, यह देखने वाली बात होगी.
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