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RJD सुप्रीमो लालू यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली कर दिया है। दोनों अब कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी आवास में शिफ्ट हो गए हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने परिवार के साथ 1 पोलो रोड स्थित सरकारी आवास में रहेंगे।
दरअसल, 10 सर्कुलर रोड लंबे समय तक लालू परिवार का प्रमुख सरकारी आवास रहा। राबड़ी देवी को साल 2006 में बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद यह सरकारी आवास अलॉट किया गया था। तब से यह बंगला बिहार की राजनीति के कई अहम फैसलों का केंद्र माना जाता रहा है।
इसी आवास में रहते हुए तेजस्वी यादव ने भी साल 2015 में पहली बार बिहार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब परिवार के नए आवास में शिफ्ट होने के साथ ही इस बंगले से जुड़ा एक लंबा राजनीतिक अध्याय भी समाप्त हो गया है।
4 नोटिस मिलने के बाद राबड़ी देवी ने आवास खाली किया
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवंटित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने की समय-सीमा सोमवार को समाप्त हो गई थी। भवन निर्माण विभाग ने उन्हें बंगला खाली करने के लिए चार बार नोटिस जारी किया था।
हालांकि, दो दिन पहले ही राबड़ी देवी के आप्त सचिव ने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर आवास खाली करने के लिए 5 जुलाई तक अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी सोमवार को अपना सरकारी आवास खाली कर 1 पोलो रोड स्थित नए सरकारी आवास में शिफ्ट हो गए थे।
राबड़ी देवी ने सरकार से सामान की लिस्ट मांगी
पूर्व सीएम राबड़ी देवी की ओर से जो भवन निर्माण विभाग को चिट्ठी लिखी गई। इसमें कहा गया था कि विभाग की तरफ से चार्ज रजिस्टर उपलब्ध नहीं करवाया गया है। इस रजिस्टर में उनसभी सामानों की लिस्ट दर्ज है, जिन्हें इस बंगले में शिफ्ट होते वक्त राबड़ी देवी को उपलब्ध करवाया गया था।
ये चार्ज रजिस्टर राबड़ी देवी को साल 2006 में उपलब्ध करवाया गया था। राबड़ी देवी ने इस लेटर के जरिए चार्ज रजिस्टर दोबारा से उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि सामानों के मिलान में किसी तरह का कन्फ्यूजन न हो।
सरकारी सामानों की सूची क्यों मांगी गई
राबड़ी देवी के सहायक ने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखा है। 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास का चार्ज रजिस्टर और विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए सभी सरकारी सामानों की सूची मांगी थी।
पत्र में कहा गया है कि आवास खाली करते समय हर सामान का सही मिलान हो सके और भविष्य में किसी तरह का विवाद या भ्रम की स्थिति पैदा न हो। साथ ही इस बात की भी आशंका न रहे कि सरकारी सामान अपने साथ ले जाया गया।
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