Bihar

बिहार में अब आसमान से रखी जाएगी पुलों पर नजर, इजराइल के विशेषज्ञों से हो रही बात, जानिए सम्राट सरकार का प्लान

बिहार में पुलों की सुरक्षा को लेकर अब बड़ा कदम उठाया जा रहा है. राज्य के पुलों की सेहत की जांच अब सेटेलाइट तकनीक से करने की तैयारी है. इसके लिए पथ निर्माण विभाग ने इजराइल के विशेषज्ञों से संपर्क किया है. विभाग इस तकनीक पर अध्ययन कर रहा है. अध्ययन पूरा होने के बाद कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद बढ़ी चिंता

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक स्पैन गंगा नदी में गिरने के बाद विभाग अलर्ट मोड में है. इसके अलावा राज्य के कई पुलों में दरार और खराबी की घटनाएं सामने आई हैं. इन्हीं घटनाओं के बाद पुलों की निगरानी को और मजबूत करने का फैसला लिया गया है.

पथ निर्माण विभाग और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लगातार पुलों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं. इजराइल के विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक भी की गई है. बैठक में यह समझने की कोशिश की गई कि सेटेलाइट तकनीक पुलों की जांच में कितनी मददगार हो सकती है.

साल में दो बार होगी हर पुल की जांच

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने फैसला लिया है कि अब राज्य के सभी पुलों का साल में दो बार निरीक्षण किया जाएगा. इसी अभियान के तहत अब तक चार हजार से अधिक पुलों की जांच की जा चुकी है. फिलहाल किसी बड़े खतरे की पुष्टि नहीं हुई है.

पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र ने कहा कि जैसे पुल निर्माण में इंजीनियरों की टीम काम करती है, वैसे ही अब पुलों के निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी. विभाग इसके लिए एक मानक संचालन प्रणाली यानी एसओपी तैयार कर रहा है.

सेटेलाइट से कैसे होती है पुलों की निगरानी?

विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कई देशों में पुलों की निगरानी के लिए सेटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. इसमें रडार इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है. इस तकनीक की मदद से पुल में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों का भी पता लगाया जा सकता है. पुल में झुकाव, दरार या हलचल जैसी चीजें मिलीमीटर स्तर तक पकड़ी जा सकती हैं. कई बार ये बदलाव आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन सेटेलाइट उन्हें पहचान लेता है.

हाल के बड़े पुल हादसे और घटनाएं

03 मई 2026: भागलपुर में विक्रमशिला पुल का एक स्पैन गंगा नदी में गिर गया था.

23 मई 2026: गोपालगंज में गंडक नदी पर बने पुल के स्पैन में दरार आने के बाद आवागमन रोक दिया गया.

फरवरी 2026: जमुई के खैरा-सोनो मार्ग पर नरियाना-मांगोबंदर पुल पर भी आवाजाही बंद करनी पड़ी थी.

IIT पटना की रिपोर्ट में भी चेतावनी

आईआईटी पटना की एक रिपोर्ट में राज्य के आधा दर्जन पुलों की तत्काल मरम्मत की जरूरत बताई गई है. इसके बाद विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है.

सरकार का मानना है कि सेटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल से पुलों में खराबी का पहले ही पता चल जाएगा. इससे समय रहते मरम्मत हो सकेगी और बड़े हादसों को रोका जा सकेगा.

 

Avinash Roy

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