यूजीसी नियम लागू कराने पटना की सड़कों पर उतरे छात्र, पुलिस से भिड़ंत्त; 7 हिरासत में

बिहार की राजधानी पटना में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियम लागू करने के समर्थन में छात्र-छात्राओं ने बुधवार को बड़ा प्रदर्शन हुआ। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर गए और लोकभवन तक मार्च शुरू किया। इस बीच पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की गई, तो प्रदर्शनकारी भड़क गए। वे आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उन्हें रोक दिया। पुलिस ने 8 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है।
हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों में अमर आजाद पासवान, गौतम आनंद, अंबुज पटेल, सुबोध कुमार, प्रेम, दीपक नीरज रजा और अविनाश कुमार शामिल हैं। सभी को पटना के कोतवाली थाना लाया गया है। बुधवार को हुए मार्च में ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले एसएफआई, भीम सेना, आईसा जैसे संगठनों ने हिस्सा लिया।

पटना के कोतवाली थाने में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी
जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर गांधी मैदान से लोकभवन तक मार्च शुरू किया। जैसे ही प्रदर्शनकारियों का काफिला जेपी गोलंबर पहुंचा स्थिति बेकाबू हो गई। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सड़क पर बैरिकेडिंग कर दी। इससे कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।

वहीं, कुछ प्रदर्शकारी बैरिकेड पर चढ़कर उन्हें पार करने की कोशिश करने लगे। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच नोंकझोंक भी हुई। हालात बिगड़ने की आशंका के बीच पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। इससे वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। प्रदर्शन की वजह से डाक बंगला चौराहा और आसपास के क्षेत्र में वाहनों का लंबा जाम लग गया।
प्रदर्शकारियों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी के नए नियमों को लागू करने की मांग की। साथ ही, एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी वर्ग की आरक्षण सीमा 65 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने के पूर्व के फैसले को भी लागू करने की मांग कर रहे हैं।

यूजीसी के नए नियमों पर क्यों हंगामा?
दरअसल, जनवरी 2026 में यूजीसी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में नए नियम लागू किए थे। इसका मकसद एससी, एसटी, ओबीसी छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षण संस्थानों में होने वाले भेदभाव को रोकना था। इस पर सवर्ण वर्ग ने आपत्ति जताई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और शीर्ष अदालत ने इस पर अंतरिम रोक लगा दी थी। एक वर्ग जहां इन नियमों के खिलाफ हो गया तो वहीं दूसरा वर्ग इन नियमों को लागू कराने पर अड़ा हुआ है।





