ईरान-इजराइल वार से उत्पन्न एलपीजी क्राइसिस के बीच समस्या के समाधान निकालने का जिम्मा जीविका दीदियों ने अपने हाथों में लिया है। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं रसोई में इंडक्शन चूल्हे पर खाना बनाएं, उन्हें अपने गांव में ही यह चूल्हा उपलब्ध हो इसके लिए अब जीविका दीदियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दीदी अब तक सोलर प्लेट और बल्ब आदि तैयार करती थीं। वह इंडक्शन चूल्हा भी तैयार करेंगी। इसके लिए राज्य की सात हजार जीविका दीदियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दीदियों को आईआईटी मुंबई और दिल्ली के प्रतिनिधियों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए जीविका की ओर से तैयारी शुरू कर दी गयी है।
जीविका वुमेन इनिशिएटिव फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एंड सॉल्युशन प्राइवेट लिमिटेड गयाजी को इसकी जिम्मेवारी दी गई है। इस कंपनी से जुड़ी जीविका दीदी संजू देवी ने बताया कि सोलर प्लेट और सोलर बल्ब हम लोग मिलकर बना रहे थे। पूरे बिहार में सोलर प्लेट की सप्लाई भी होती थी। अब इंडक्शन चूल्हा भी सभी दीदी बनाएंगी। इसके लिए सभी को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाके में गैस की किल्लत से निजात मिलेगी। बता दें कि इन दिनों गैस की किल्लत है। चूंकि ग्रामीण इलाके में इसका असर ज्यादा है। सरकार ने 45 दिनों के बाद ही गैस मिलने का नियम भी बनाया है। इससे परेशानी ज्यादा है। ऐसे में इंडक्शन चूल्हा विकल्प भी ग्रामीण इलाकों में दिया जाएगा। चूल्हे का उत्पादन करके ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सस्ते दामों में उपलब्ध कराया जाएगा ताकि गैस नहीं रहने पर इसका उपयोग हो सके।
महिला उद्यमियों को तकनीशियन बनाने का प्रयास किया जा रहा
जीविका की ओर से अब महिला उद्यमियों को तकनीकी रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा और सशक्त महिला बनाने के मकसद से जीविका वुमेन इनिशिएटिव फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एंड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड गयाजी का गठन जीविका दीदियों द्वारा किया गया। छह जनवरी 2020 में बने इस कंपनी से अब तक सात हजार से अधिक जीविका दीदी जुड़ी है। इसे और आगे बढ़ाया जा रहा है।
बाजार से सस्ता मिलेगा इंडक्शन चूल्हा
बिहार दिवस पर गांधी मैदान में जीविका दीदियों ने इंडक्शन चूल्हा का स्टॉल लगाया था। तीन दिनों में दस चूल्हा बिका और 30 की एडवांस बुकिंग भी हुई। ये चूल्हा अमेरिकन कंपनी फेविस्ता की ओर से तैयार किया गया है। चूल्हे को जीविका दीदियों द्वारा गयाजी के कई गांवों में नि:शुल्क में वितरण किया गया है। चूंकि युद्ध के कारण अभी इंडक्शन चूल्हा नहीं आ पा रहा है। ऐसे में अब जीविका दीदियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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