बिहार में बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसलों का मिलेगा मुआवजा, होगा नुकसान का सर्वे?

बिहार में बीते 24 घंटों में मौसम के रौद्र रूप ने किसानों की फसल चौपट कर दी हैं. तैयार खड़ी रबी फसलें आंधी और बारिश में बर्बाद हो गईं, जिससे खेतों में भारी नुकसान हुआ है.
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बेमौसम बारिश और ओला गिरने से हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ित किसानों का है.

शुरू होगी किसानों के नुकसान की मैपिंग
कृषि मंत्री ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से खेतों में जाकर फसलों की क्षति का आकलन करने का निर्देश दिया है. जिन क्षेत्रों में 33 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हुई है, वहां की विस्तृत रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपने को कहा गया है.
सरकार का लक्ष्य है कि बिना किसी देरी के पीड़ित किसानों की पहचान की जाए ताकि मुआवजे की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा सके.

इन फसलों का हुआ नुकसान
अचानक बदले मौसम के मिजाज ने सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, मक्का और सरसों की फसलों पर पहुंचाई है. कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलें तेज हवाओं के कारण खेतों में बिछ गई हैं और जलभराव के कारण अनाज की गुणवत्ता खराब होने का डर है.

मोकामा और आसपास के टाल क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि दलहन की फसलों का नुकसान है. दलहन अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इस बारिश ने न केवल अनाज बल्कि पशुचारे के संकट को भी बढ़ा दिया है.

आम और लीची के बगानों नुकसान की होगी मैपिंग
केवल रबी फसलें ही नहीं, बल्कि बिहार की शान माने जाने वाले आम और लीची के बागों पर भी आफत बरसी है. तेज आंधी के कारण पेड़ों पर लगे बौर (फूल) बुरी तरह झड़ गए हैं, जिससे इस साल फलों के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है.

बगान मालिकों का कहना है कि साल भर की मेहनत पर पानी फिरने से उन्हें बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में लीची की फसल को लेकर किसान काफी मायूस हैं.

धैर्य रखें अन्नदाता, हम आपके साथ हैं
कृषि मंत्री ने किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वे इस मुश्किल घड़ी में धैर्य बनाए रखें. उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी प्रभावित किसान को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. सरकार नियमानुसार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी.
वर्तमान में रबी फसलों की कटाई का सीजन चल रहा था, ऐसे में कुदरत की इस मार ने किसानों की पूरी साल की प्लानिंग को अस्त-व्यस्त कर दिया है.
