बिहार में जनगणना का काउंटडाउन शुरू, अप्रैल 2026 से पहला चरण, 33 सवालों के देने होंगे जवाब…

भारत की आगामी जनगणना-2027 को लेकर बिहार में तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है. इसे लेकर राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की दूसरी अहम बैठक पटना स्थित पुराने सचिवालय में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की. बैठक में सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और जनगणना से जुड़ी प्रशासनिक, तकनीकी और समन्वय संबंधी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई.
बैठक में स्पष्ट किया गया कि जनगणना-2027 दो चरणों में आयोजित होगी. पहला चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना से जुड़ा होगा, जिसे अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चयनित 30 दिनों में पूरा किया जाएगा. इस चरण के बाद संबंधित अधिसूचना राज्य राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी.

सीमा स्थिरीकरण से बदलेगा प्रशासनिक खेल
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि भारत सरकार की सीमा स्थिरीकरण अधिसूचना के तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी भी ग्रामीण या शहरी प्रशासनिक इकाई की सीमा अथवा क्षेत्राधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. वर्तमान में बिहार में 534 ग्रामीण और 265 शहरी प्रशासनिक इकाइयां, जिनमें एक छावनी परिषद भी शामिल है, अधिसूचित हैं और इन्हीं के आधार पर जनगणना का कार्य किया जाएगा.
33 सवालों पर टिकी होगी पहली गणना
पहले चरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका संबंध मकानों की स्थिति, उनके उपयोग, उपलब्ध सुविधाओं, परिसंपत्तियों और मुख्य अनाज के उपभोग से होगा. ये सभी प्रश्न केंद्र सरकार द्वारा 23 जनवरी 2026 को विधिवत जारी किए जा चुके हैं. इस चरण की नोडल जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को सौंपी गई है.

जियो-स्पैशियल तकनीक बनेगी जनगणना की रीढ़
जनगणना की योजना के शुरुआती चरण से ही जियो-स्पैशियल डेटा और एनालिटिक्स के इस्तेमाल को अनिवार्य किया गया है. इसी क्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) के महानिदेशक टीपी सिंह के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. इसमें प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल के तहत बिहार में जियो-स्पैशियल तकनीक के प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई. मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क, रेल, बिजली और सिंचाई जैसी बड़ी परियोजनाओं में शुरुआती स्तर पर बेहतर डेटा से कई समस्याओं से बचा जा सकता है. इसी दौरान मुख्य सचिव ने नेशनल डिफेंस कॉलेज के अध्ययन दल को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 15–20 वर्षों में बिहार ने तमाम चुनौतियों के बावजूद आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. उन्होंने इसे सुशासन और विकास का परिणाम बताया.





