बिहार और बंगाल से कुछ हिस्सा काटकर बन सकता है नया राज्य! जानें क्यों शुरू हुई ये चर्चा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय बिहार दौरे ने राज्य की सियासत में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है. गृह मंत्री के इस दौरे के बीच एक ऐसी चर्चा तेज हो गई है जिसने बिहार और पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. दरअसल, आरजेडी विधायक रणविजय साहू ने दावा किया है कि बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी चल रही है. बता दें अगर ऐसा होता है तो इससे विपक्षी पार्टियों का चुनावी समीकरण पूरी तरह बिगड़ सकता है.
आरजेडी विधायक रणविजय साहू के अनुसार अमित शाह का ये दौरा महज प्रशासनिक नहीं है. उनके अनुसार केंद्र सरकार बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को जोड़कर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पर काम कर रही है. साहू का आरोप है कि इस कदम के पीछे असली मकसद राजनीतिक है. उनका कहना है कि अगर ऐसा होता है तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार में आरजेडी का एक बड़ा मुस्लिम वोट बैंक प्रभावित होगा.

इन 6 जिलों पर टिकी हैं सबकी नजरें
इस चर्चा के केंद्र में मुख्य रूप से छह जिले शामिल बताए जा रहे हैं. इनमें तीन जिले बिहार के हैं और तीन पश्चिम बंगाल के. बिहार की ओर से किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार का नाम सामने आ रहा है. वहीं पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग को इस नए प्रस्तावित क्षेत्र का हिस्सा बताया जा रहा है. बता दें कि भौगोलिक रूप से ये सभी जिले एक दूसरे से सटे हुए हैं और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण गलियारे का निर्माण करते हैं.

बिहार के जिलों क्या है गणित
इस पूरी बहस की जड़ इन जिलों की जनसंख्या और धार्मिक आंकड़ों में छिपी है. बिहार का किशनगंज जिला मुस्लिम बहुल है जहां मुस्लिम आबादी लगभग 68 प्रतिशत है और हिंदू 31.43 प्रतिशत है. पूर्णिया में हिंदू आबादी 60.96 प्रतिशत और मुस्लिम 38.46 प्रतिशत है. कटिहार में भी स्थिति मिली जुली है. यहां 68% हिंदू और करीब 31.43% मुस्लिम आबादी है. यह जिला बिहार का वो हिस्सा है जो बंगाल और झारखंड दोनों से कनेक्ट होता है और रेलवे और व्यापार का एक अहम केंद्र भी है.

बंगाल में क्या है स्थिति
वहीं पश्चिम बंगाल की बात करें तो यहां के उत्तर दिनाजपुर में लगभग बराबर की आबादी है. वहीं पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले की स्थिति सबसे दिलचस्प है. यहां पर मुस्लिम 49.92% है और हिंदू यहां पर तकरीबन 49.31% है. कुल आबादी 32 लाख से ऊपर है. दक्षिण दिनाजपुर की बात की जाए पश्चिम बंगाल में तो हिंदू बहुल क्षेत्र है. दक्षिण दिनाजपुर में हिंदू 73.55% है. मुस्लिम 24.63% है. यह जिला अपेक्षाकृत हिंदू बहुल है. यहां पर मुस्लिम आबादी मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में निवास करती है. जबकि शहरी क्षेत्रों में हिंदू आबादी अधिक है. दार्जिलिंग की बात की जाए तो देखिए पश्चिम बंगाल का ये जिला है और यहां पर बहुधार्मिक पहाड़ी जिला दार्जिलिंग एक अनूठा जिला है. यहां पर हिंदू आबादी सबसे अधिक है. लेकिन इसके साथ बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म भी व्यापक पैमाने पर यहां पर है और चाय बगानों के लिए यह प्रसिद्ध है और यह जिला पहले से ही गोर्खा लैंड की मांग को लेकर राजनीतिक रूप से उबल चुका है. इस जिले को किसी नए राज्य में शामिल करना अपने आप में एक जटिल प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती होगी.

बदल जाएगी बिहार और बंगाल की राजनीति?
अगर इन जिलों को मिलाकर एक अलग प्रशासनिक इकाई बनाई जाती है तो इसका सीधा असर राज्यों की विधानसभा सीटों पर पड़ेगा. विपक्षी नेताओं का मानना है कि इन इलाकों का प्रतिनिधित्व राज्यों की विधानसभा से खत्म होने पर सत्ता पक्ष को सीधा फायदा होगा. हालांकि भाजपा की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. पार्टी इस दौरे को संगठन की मजबूती और विकास कार्यों की समीक्षा बता रही है. फिलहाल यह मुद्दा एक बड़ी राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है जिसका भविष्य केंद्र सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगा.


