NEET छात्रा कांड में बड़ा ऐक्शन; FSL ने मां-बाप, मामा, भाई का DNA सैंपल कलेक्ट किया

पटना में NEET छात्रा से रेप-मौत केस में FSL ने 5 लोगों के DNA सैंपल लिए हैं। जहानाबाद में लड़की की मां, पिता, मामा और भाई का सैंपल कलेक्ट किया गया है।
जेल में बंद शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष चंद्रवंशी और संचालक अंशु अग्रवाल की भी DNA जांच होगी। जल्द ही पुलिस बेऊर जेल जाकर मनीष का सैंपल लेगी या उसे रिमांड पर बाहर लाया जाएगा। इधर, परिवार के लोगों के ही सैंपल कलेक्ट करने से छात्रा के पिता ने जांच पर फिर सवाल उठाए हैं।

फॉरेंसिंक जांच में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिला
छात्रा के परिजनों ने 10 जनवरी को पुलिस को कुछ कपड़े दिए थे। जिनकी फॉरेंसिंक जांच करवाई गई है। 2 दिन पहले ये जांच रिपोर्ट भी SIT को सौंपी गई थी। इसमें छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिला है।
इसके बाद FSL की टीम DNA टेस्ट की तैयारी कर रही है। जिसके लिए आज सैंपल लिए गए हैं। पुलिस को अब तक जिन लोगों पर शक है उनके DNA से इसका मिलान किया जाएगा।

FSL की रिपोर्ट आने के बाद PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर भी मुहर लग गई है। PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखा गया था कि यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता है।
लापरवाही पर 2 थानेदार सस्पेंड
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ रेप-मौत मामले में कार्रवाई करते हुए SSP ने शनिवार को चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

2 पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद गृह मंत्री सम्राट चौधरी सख्त दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने प्रदेश के डीजीपी विनय कुमार, एडीजी, एसएसपी और पूरी SIT को तलब किया है। एसआईटी आठ दिन बाद भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। बताया जा रहा है कि सम्राट चौधरी एसआईटी की वर्किंग से संतुष्ट नहीं हैं। इस पूरे मामले में विभाग की बहुत किरकिरी हुई है।

इसके साथ ही, रेप-मर्डर केस की जांच में CID की एंट्री हो गई है। रविवार सुबह CID की टीम शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और जांच शुरू की। करीब 2 घंटे के बाद CID की टीम हॉस्टल की जांच-पड़ताल कर बाहर निकली। हालांकि, CID के अधिकारी ने मीडिया के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया।

छात्रा के पिता ने DGP से पत्र लिखकर की 8 मांग
- मृतक छात्रा के पिता ने बिहार के DGP को पत्र लिखकर SIT को निष्पक्ष जांच के निर्देश देने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही 8 मांग की है।
- 5 जनवरी की शाम 5 बजे से 6 जनवरी तक के CCTV फुटेज की FSL जांच कराएं। हॉस्टल में मौजूद लड़कियों के बयान लें और उनके मोबाइल के CDR की जांच कराएं।
- हॉस्टल के मकान मालिक मनीष रंजन के पिछले दरवाजे के CCTV फुटेज की FSL जांच कराई जाए। आसपास के गली और सड़क के CCTV फुटेज की जांच हो। मनीष रंजन और उनके बेटा के मोबाइल का CDR निकालकर जांच कराएं।

- हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और उसके बेटे आशु अग्रवाल के मोबाइल का CDR निकालकर जांच कराएं।
- डॉ. सहजा नन्द प्रसाद सिंह, डॉ. सतीश कुमार (प्रभात हॉस्पिटल), डॉ. अभिषेक और महिला डॉक्टर जया के मोबाइल के CDR की जांच कराएं।
- चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी की भूमिका की जांच कराई जाए।
- 7 जनवरी को अस्पताल की एक नर्सिंग स्टाफ ने छात्रा की मां को बताया कि लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है। उसकी पहचान कर उसका बयान लिया जाए।
- छात्रा ने जो कपड़े पहने थे उसे प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल ने परिजनों को नहीं लिए। वो कपड़ा जांच में अहम सुराग साबित होता।
- 8 जनवरी तक सभी जांच रिपोर्ट होने के बाद भी बच्ची का इलाज ड्रग एब्यूज के लिए नहीं किया गया। 9 जनवरी को प्रभात हॉस्पिटल के आईसीयू में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अभिषेक ने वायरल मेनिन्जाइटिस, सिर में खून जमने की दवा देने की बात परिजन को कही। फिर किस आधार पर मौत की वजह नींद की दवा सिद्ध करने की कोशिश हो रही है।
