मरीजों की सुविधा और दवा संबंधी भ्रम को खत्म करने के उद्देश्य से नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने एक अहम निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब पटना सहित पूरे बिहार के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को मरीजों के पर्चे पर दवाओं के नाम स्पष्ट, पढ़ने योग्य और कैपिटल अक्षरों में लिखने होंगे। साथ ही, डॉक्टर केवल जेनरिक दवाओं के नाम ही पर्चे पर दर्ज करेंगे।
यह निर्देश पीएमसीएच, पटना एम्स, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस सहित राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है। एनएमसी ने यह आदेश पंजाब, हरियाणा सहित कुछ अन्य राज्यों के हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जारी किया है, इसकी लिखित सूचना सभी मेडिकल कालेज अस्पतालों को प्राप्त हो चुकी है। मेडिकल कालेजों के बाद इसे जल्द ही जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी लागू किया जाएगा।
एनएमसी ने डॉक्टरों को अपनी लिखावट में सुधार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। आयोग का कहना है कि दवाओं के नाम इस तरह लिखे जाएं कि मरीज, फार्मासिस्ट या स्वास्थ्यकर्मी को पढ़ने में किसी तरह की परेशानी न हो। आड़ी-तिरछी, अस्पष्ट और समझ से बाहर लिखावट अब स्वीकार्य नहीं होगी। पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. कौशल किशोर एवं आइजीआईएमएस के प्राचार्य डॉ. रंजीत गुहा ने बताया कि मरीजों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए एनएमसी के सभी निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों और चिकित्सकों को सूचित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर एक निगरानी समिति का गठन भी किया जाएगा, जो निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा करेगी।
एनएमसी ने साफ किया है कि डॉक्टर केवल जेनरिक दवाएं ही लिखेंगे। यदि किसी संस्थान में ब्रांडेड दवा लिखे जाने की शिकायत मिलती है तो संबंधित अधिकारी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। इसके साथ ही गठित समितियों को नियमित बैठक कर अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। एनएमसी के इस फैसले से मरीजों को सही दवा मिलने में आसानी होगी और दवा संबंधी गलतियों पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।
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