गुरुवार की सुबह से स्नातकोत्तर में नामांकन से वंचित छात्र-छात्राओं की जिज्ञासा चरम पर थी। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर में नामांकन के लिए स्पॉट राउंड की सीटों का नामांकन पोर्टल साढ़े 11 बजे खुलने का समय निर्धारित था। जैसे ही साढ़े 11 बजा, एक मिनट के अंदर ही पोर्टल से सीटें विलुप्त हो गईं। सभी छात्र हक्का-बक्का रह गए कि विभिन्न काॅलेजों में नामांकन के लिए रिक्त दर्शाई जा रही सीटें अचानक कहां विलुप्त हो गईं। विश्वविद्यालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जैसे ही कोई छात्र रिक्त सीट पर क्लिक करेगा, वह सीट विलुप्त हो जाएगी।
लेकिन, दर्जनों छात्रों को क्लिक करने का अवसर नहीं मिला और सीटें गायब हो गईं। इस स्थिति को लेकर छात्र अपने करियर को लेकर चिंतित हो गए। कुछ छात्र विश्वविद्यालय की ओर कूच कर गए और छात्र कल्याण कार्यालय को घेरकर बैठ गए। इस दौरान पदाधिकारियों और कर्मचारियों को भी अवसर मिला कि वे पीड़ित छात्रों का समाधान नहीं कर पाने के कारण कार्यालय बंद रहने का बहाना बनाकर अन्यत्र चले गए।
मिथिला विश्वविद्यालय में डीएसडब्ल्यू कार्यालय को घेरने वाले छात्र राज कुमार पासवान ने आरोप लगाया कि डाटा सेंटर के बहाने विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पॉट राउंड नामांकन के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी की है। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर में एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो छात्रों की समस्याओं को हल करने के लिए मोटी रकम का ठेका लेता है। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा उन पदाधिकारियों को भी मिलता है, जिनके संरक्षण में यह लूट मचाई जा रही है। छात्र अमन चौधरी, अक्षय सिंह और उत्कर्ष लाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के पदाधिकारी स्पॉट राउंड का सही अर्थ नहीं समझते।
अधिसूचना में स्पॉट राउंड का उल्लेख किया गया है, लेकिन कार्य सामान्य नामांकन प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। जब छात्र को नामांकन के लिए कॉलेज आवंटित कर दिया गया है, तो चयन सूची दो दिनों के बाद क्यों जारी की जाएगी? राकेश बैठा ने कहा कि विश्वविद्यालय का डाटा सेंटर पहले से ही बिचौलियागिरी के लिए बदनाम है। वही बिचौलिए नामांकन के लिए परेशान छात्रों से सौदा कर डाटा सेंटर के माध्यम से पोर्टल खुलते ही क्लिक कर देते हैं, जिससे सीटें विलुप्त हो जाती हैं। हालांकि कुलानुशासक प्रो. विजय कुमार यादव और छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार मेहता आंदोलनरत छात्रों से वार्ता के लिए पहुंचे। इस वार्ता में सहमति बनी कि स्पट राउंड नामांकन की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और कुलपति के आने पर सीट बढ़ोतरी के लिए सरकार को लिखा जाएगा।
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