ADR और बिहार इलेक्शन वाच नीतीश कुमार के कैबिनेट मंत्रियों की सूची जारी की है. इसमें कौन मंत्री कितने अमीर हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की गयी है. वित्तीय विवरण के अनुसार 24 में से 21 मंत्री करोड़पति हैं. मंत्रियों की औसत संपत्ति 5.32 करोड़ रुपये दर्ज की गई है. सरकार की आर्थिक प्रोफाइल को देखें तो यह साफ है कि अधिकांश मंत्रियों की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है. सत्ता में वित्तीय रूप से संपन्न नेताओं का वर्चस्व कायम है.
दीपक प्रकाश का ब्योरा नहीं:
जदयू के अशोक चौधरी और BJP के डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी को शपथ पत्र जमा करने से छूट मिली हुई है, इसलिए उनकी आपराधिक या वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं है. आरएलएम के दीपक प्रकाश का विश्लेषण इसलिए शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वे वर्तमान में किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं.
सबसे अमीर मंत्री रमा निषाद:
औराई सीट से निर्वाचित रमा निषाद ने सबसे अधिक 31.86 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है. वे मंत्रिमंडल में सर्वाधिक संपत्ति रखने वाली मंत्री के रूप में उभरी हैं. उनका वित्तीय खुलासा मंत्रियों की संपत्ति के औसत को भी काफी ऊपर ले जाता है. बीजेपी के 85% मंत्री करोड़पति है, वहीं जदयू और हम पार्टी के 100% मंत्री करोड़पति हैं. जबकि लोजपा के 50% मंत्री करोड़पति हैं.
सबसे कम संपत्ति वाले मंत्री संजय कुमार:
लोजपा रामविलास के टिकट पर बखरी से विधायक बने संजय कुमार कैबिनेट मंत्री बने. इन्होंने सबसे कम 22.30 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है. उनकी संपत्ति अन्य मंत्रियों की तुलना में काफी कम है, जिससे वे सदन के सबसे साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले मंत्री के रूप में सामने आते हैं.
15 मंत्रियों ने अपनी देनदारियां दिखाई:
रिपोर्ट में 15 मंत्रियों ने अपनी देनदारियां घोषित की हैं. इनमें लखीसराय के विधायक और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सबसे अधिक 82.33 लाख रुपये की देनदारी दिखाई है. यह आंकड़ा बताता है कि आर्थिक रूप से मजबूत दिखने वाले कई मंत्री कर्ज के बोझ तले भी दबे हुए हैं.
मंत्रियों की शैक्षिक योग्यता:
मंत्रिमंडल की शैक्षिक पृष्ठभूमि को देखें तो 8 मंत्रियों ने अपनी शिक्षा 10वीं से 12वीं के बीच बताई है. 15 मंत्रियों ने स्नातक और उससे अधिक की योग्यता घोषित की है. एक मंत्री डिप्लोमा धारक हैं. इससे स्पष्ट है कि मंत्रिमंडल में उच्च शिक्षा प्राप्त मंत्रियों का वर्चस्व है, लेकिन मध्यम शिक्षा वाले नेताओं की भी अच्छी भागीदारी बनी हुई है.
आयु वर्ग और अनुभव का संतुलन:
मंत्रियों की आयु प्रोफाइल के अनुसार 5 मंत्रियों की आयु 30 से 50 वर्ष के बीच है, जबकि 19 मंत्री 51 से 80 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं. वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी बताते हैं कि यह रिपोर्ट दर्शाता है कि सरकार में वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की संख्या युवा मंत्रियों की तुलना में अधिक है.
महिला मंत्रियों की सीमित भागीदारी:
रिपोर्ट के अनुसार 27 में से केवल 3 महिला मंत्री हैं, यानी कुल मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी मात्र 11 प्रतिशत है. यह आंकड़ा बिहार राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है.
आपराधिक मामले:
ADR और बिहार इलेक्शन वाच ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्यमंत्री सहित 27 में से 24 मंत्रियों के शपथ पत्रों का विस्तृत विश्लेषण किया है. रिपोर्ट के अनुसार 24 मंत्रियों में से 11 मंत्रियों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं. 9 मंत्रियों ने गंभीर धाराओं के तहत दर्ज मामलों की जानकारी दी है.
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