नाटकीय अंदाज में मुकेश सहनी कैसे बने डिप्टी CM फेस; होटल के अंदर क्या-क्या हुआ? इनसाइड स्टोरी

बिहार में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में अगर विपक्षी महागठबंधन को जीत मिलती है तो विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री होंगे, जबकि विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक मुकेश सहनी उप मुख्यमंत्री होंगे। गुरुवार को राजधानी पटना के होटल मौर्या में आयोजित महागठबंधन के घटक दलों के नेताओं के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के लिए जादूगर कहलाने वाले अशोक गहलोत ने ये घोषणा की।
गहलोत ने यह भी कहा कि सहनी के अलावा समाज के अन्य वर्गों से भी उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर उसमें कितने उप मुख्यमंत्री होंगे। दरअसल, सीएम फेस का ऐलान करने के लिए महागठबंधन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेन्स का आयोजन किया था लेकिन प्रेस मीट शुरू होने से ठीक घंटेभर पहले होटल में ऐसे नाटकीय घटनाक्रम हुए कि न सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेन्स घंटेभर के टालना पड़ा बल्कि दिल्ली तक फोन घुमाने पड़ गए।

हुआ यूं कि पहले प्रेस मीट सुबह 11.30 पर होना था लेकिन धीरे-धीरे महागठबंधन के नेता प्रेस मीट वाली जगह से गायब होते चले गए। हालांकि, दीपांकर भट्टाचार्य वहीं बैठे रहे। इसी बीच खबर उड़ी कि मुकेश सहनी ने उप मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर दी है, इसलिए उनका मान मनौव्वल चल रहा है। इससे पहले महागठबंधन दलों के नेता होटल में ही एक सुइट में ठहरे अशोक गहलोत के कमरे में जमा हो चुके थे। राजद नेता तेजस्वी यादव भी वहां मौजूद थे लेकिन सहनी वहां नहीं पहुंचे, जबकि वह भी इसी होटल के एक सुइट में ठहरे हुए थे।

सूत्र बताते हैं कि सहनी ने बिहार के हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों के लिए लड़ने के अपने रिकॉर्ड के आधार पर, गठबंधन में ‘सम्मानजनक स्थान’ के बिना बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद महागठबंधन के दलों के बीच अचानक सन्नाटा छा गया। इसके बाद आनन फानन में आपात बैठकों का दौर शुरू हुआ। NDTV की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सहनी ने कथित तौर पर गठबंधन प्रमुखों से कहा, ‘अगर ‘महागठबंधन’ सामाजिक न्याय की बात करता है, तो हमें पदों में भी हिस्सेदारी चाहिए… सिर्फ सीटों में नहीं…।’
यह ड्रामा प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से कुछ घंटे पहले शुरू हुआ था। सहनी का संदेश स्पष्ट था कि संदेश स्पष्ट था – ‘अगर यादव गठबंधन का चेहरा होंगे, तो मैं उनका डिप्टी बनूँगा।’ सहनी ने कहा, “मैं 25 से कम सीटों पर सहमत हुआ क्योंकि मुझे लगा था कि मुझे उप-मुख्यमंत्री का पद मिल जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मैं अपने समर्थकों का सामना कैसे कर पाऊँगा? मैं अपने समर्थकों के पास जाकर वोट कैसे माँग पाऊँगा?” बता दें कि सहनी की पार्टी वीआईपी ने 15 सीटें मिली हैं।

सहनी की इस मांग से महागठबंधन के भीतर माहौल नाजुक मोड़ पर आ गया और चुनावी माहौल बिगड़ने का ख़तरा पैदा हो गया। इसके बाद तेजस्वी यादव ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए सहनी को आश्वासन दिया कि अगर विपक्षी गठबंधन चुनाव जीतता है तो हर पार्टी सरकार का हिस्सा होगी लेकिन सहनी के लिए यह आश्वासन नाकाफी था। इसी बीच, अशोक गहलोत ने दिल्ली बात की। दिल्ली से उन्हें हरी झंडी मिल गई क्योंकि सहनी की नाराजगी का मतलब मल्लाह समुदाय के वोटों का नुकसान हो सकता है।
इसी बीच नीचे प्रेस मीट का इंतजार कर रहे वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य को भी बुलाया गया और उनसे भी सहनी के बारे में पूछा गया। उन्होंने भी हामी भर दी। इस तरह से मुकेश सहनी बॉलीवुड के सेट डिजायनर से बिहार के संभावित उप मुख्यमंत्री के चेहरे बन गए और महागठबंधन में अपना सियासी कद ऊंचा कर लिया।

हालांकि, इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद उन्होंने एनडीटीवी से एक खास बातचीत में इस बात से इनकार किया कि उन्होंने उप मुख्यमंत्री चेहरा बनाने के लिए महागठबंधन के घटक दलों पर कोई दबाव डाला था। उन्होंने कहा, “नहीं… दबाव की कोई जरूरत नहीं थी। आप कह सकते हैं कि थोड़ी देर हो गई (यानी, यादव और खुद को चेहरा घोषित करना), लेकिन हम बाकियों से बेहतर और आगे हैं।” सहनी ने यह भी दावा किया कि उन्हें 2020 के चुनाव के बाद भी उप-मुख्यमंत्री पद की पेशकश की गई थी, जब उनकी पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा थी।



