कैसे NDA सीट बंटवारे में भारी पड़ गए चिराग पासवान, जेडीयू-बीजेपी ने दी कुर्बानी

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने लंबे समय की मशक्कत के बाद रविवार शाम को सीटों के बंटवारे का ऐलान कर दिया। भाजपा-जेडीयू बराबर-बराबर यानी कि 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि चिराग पासवान की एलजेपी (आर) को 29 सीटें दी गई हैं। इसके अलावा, जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह-छह सीटें दी गई हैं। पिछले कई दिनों से सीटों के बंटवारे को लेकर पटना से दिल्ली तक, एनडीए के घटक दलों में माथापच्ची चल रही थी। इस पूरे बंटवारे से साफ है कि खुद को पीएम मोदी का ‘हनुमान’ बताने वाले चिराग पासवान अन्य सभी दलों पर भारी पड़ गए।
चिराग पासवान ने बीजेपी लीडरशिप से अपनी पार्टी के लिए शुरुआत में 40 सीटों की मांग की थी, जिसके बाद वे 30 सीटों पर अड़ गए थे। बीजेपी नेतृत्व को आखिरकार 29 सीटें देने पर मजबूर होना पड़ा। इसका खामियाजा बीजेपी, जेडीयू, हम और उपेंद्र कुशवाहा को उठाना पड़ा है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने अकेले विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिससे एनडीए गठबंधन को भारी नुकसान हुआ। जेडीयू को कई सीटों पर चिराग की वजह से हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस बार भाजपा नेतृत्व किसी भी तरह से चिराग को दूर जाने नहीं देना चाहता था। बीजेपी ने पहले उन्हें 26 सीटों का ऑफर दिया और साथ ही भविष्य में राज्यसभा सीट और एमएलसी सीट भी देने के लिए कहा गया, लेकिन चिराग किसी भी हाल में 30 से कम सीटें नहीं चाह रहे थे।

बीजेपी-जेडीयू ने खुद की सीटों की दी कुर्बानी
सूत्रों की मानें तो भाजपा और जेडीयू ने पहले अपने लिए 205 सीटें निकाली हुई थीं। इन्हीं में से दोनों दलों को एक-दूसरे के लिए बांटना था, लेकिन जब किसी भी हाल में चिराग पासवान नहीं मानें तो दोनों दलों ने अपने से तीन सीटें कम कीं। अभी दोनों दल बराबर 101-101 (कुल 202) सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा, पिछली बार जीतन राम मांझी की हम ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार भी उनकी एक सीट कम कर दी गई। जीतनराम मांझी ने 15 सीटों की सूची बीजेपी लीडरशिप को सौंप दी थी, लेकिन सिर्फ छह सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इस दौरान वह नाराज भी दिखे। सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी से बातचीत के बाद ही मांझी माने, जिसके बाद उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके साफ किया कि वे अंतिम सांस तक पीएम मोदी के साथ ही रहेंगे।

पिछली बार कितनी सीटों पर चिराग ने नुकसान पहुंचाया था?
पिछले विधानसभा चुनाव में अकेले लड़कर चिराग पासवान ने एनडीए और खासकर जेडीयू को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। उनकी वजह से जेडीयू की कम-से-कम 40 सीटों पर महागठबंधन को जीत मिली थी, जिसके चलते नीतीश कुमार को तीसरे नंबर की पार्टी से संतोष करना पड़ा। इसके बाद जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के अपने फैसले का बचाव करते हुए, चिराग पासवान ने कहा कि वह नीतीश कुमार की पार्टी को कमजोर करना चाहते थे और इसमें सफल भी रहे। उन्होंने कहा, “मैं चाहता था कि नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री न बनें, जिसके लिए मैंने ईमानदारी से कोशिश की… लेकिन हम जनता द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हैं। अगर यह हमारे हाथ में होता, तो हम हस्तक्षेप करते। लेकिन यह भाजपा और जेडी(यू) को दिया गया स्पष्ट जनादेश है और उन्हें ही फैसला लेना है।” हालांकि, जेडीयू के मुकाबले ज्यादा सीटें हासिल करने के बाद भी भाजपा ने नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाया।






