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‘पारस’ होंगे पास या औंधे मुंह गिरेंगे ? एकमात्र ‘मुशहर’ विधायक का टिकट काटने की जोखिम उठा पाएंगे तेजस्वी ? ऐसा हुआ तो कई विस क्षेत्रों पर पड़ेगा डायरेक्ट इफेक्ट…जोखिम उठाने को तैयार है RJD ?

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पशुपति कुमार पारस का सपना साकार हो पायेगा ? क्या बेटे को विधायक बना पाएंगे ? यह बड़ा सवाल है. पारस खुद को महागठबंधन का हिस्सा बता रहे हैं. हाल में महागठबंधन ने रालोजपा को साथ लिया है. अब पशुपति पारस की नजर अलौली सीट पर है. यहां से अपने बेटे यशराज को चुनाव लड़ाकर विधायक बनाना चाहते हैं. सीट कंंफर्म हुई नहीं और पारस पुत्र चुनावी तैयारी में जुट गए हैं.

पशुपति पारस जिस सीट की चाहत पाल रखे हैं, वह आसान नहीं दिखती . तेजस्वी यादव अपने एकमात्र मुशहर विधायक का टिकट काटकर उक्त सीट पारस की झोली में दे देंगे, यह समझ से परे है. अगर ऐसा हुआ तो राजद को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ोस के कई विधानसभा क्षेत्र पर पड़ेगा. बड़ा सवाल यही है कि पारस के लिए तेजस्वी यादव अपने एकमात्र मुशहर विधायक को कुर्बान करेंगे ?

पारस होंगे पास या औंधे मुंह गिरेंगे ? 

स्व. रामविलास पासवान के भाई व पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की राजनीतिक ताकत सिमट गई है. कहने को इनकी अपनी पार्टी रालोजपा महागठबंधन में शामिल है. लेकिन प्रभाव नहीं है. पारस की एकमात्र चाहत अपने बेटे को राजनीति में सेट करना है. इसके लिए जी जान से लगे हैं. इनकी नजर अपनी पुरानी सीट, जहां से वे लंबे समय तक विधायक रहे, उस सीट पर है. वे अपने बेटे यशराज के लिए विधानसभा की अलौैली सीट चाहते हैं. इसके लिए लगातार पसीना बहा रहे. बेटे को चुनावी मैदान में उतार दिया है. बेटा लगातार जनसंपर्क कर रहा है. हालांकि मिशन सफल होगा, इस पर संशय है.

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जोखिम उठाने को तैयार है राजद ? 

वर्तमान में अलौली सीट पर राजद का कब्जा है. 2020 के चुनाव में राजद से एकमात्र मुशहर विधायक रामवृक्ष सदा अलौली सीट से ही चुनाव जीते थे. अलौली सीट मुशहर बहुल सीट है. बताया जाता है कि इस सीट पर मुशहरों की बड़ी आबादी है. इस समाज का इस सीट पर प्रभाव है. 2020 में राजद के रामवृक्ष सदा ने जेडीयू प्रत्याशी साधना देवी(मुशहर) को 2773 मतों से पराजित किया था. जबकि लोजपा से भी मुशहर समाज का प्रत्याशी रामचंद्र सदा उम्मीदवार थे. इन्हें 26386 मत मिले थे. वर्तमान में रामचंद्र सदा, साधना देवी और 2015 में राजद के टिकट पर चुनाव जीते चंदन कुमार जनता दल (यू) में है.

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एकमात्र मुशहर विधायक का टिकट काटना कठिन,तेजस्वी ऐसा कर पाएँगे ? 

राजद ने 2020 के विधानसभा चुनाव में अपने संघर्षशील कार्यकर्ता रामवृक्ष सदा को टिकट दिया था. पार्टी ने अपने सीटिंग विधायक चंदन कुमार जो 2015 के विस चुनाव में जीते थे, उनका टिकट काटकर इन्हें उम्मीदवार बनाया था. जिस भरोसे के साथ राजद ने एक कार्यकर्ता रामवृक्ष सदा को उम्मीदवार बनाया, उसमें सफल रहे. न सिर्फ अलौली बल्कि पूरे बिहार में रामवृक्ष सदा मुशहर समाज में पार्टी का झंड़ा बुलंद कर रहे. इनका प्रभाव न सिर्फ अलौली विधानसभा बल्कि पूरे कोशी इलाके में है.

ऐसे में सवाल यही है कि क्या पारस के बेटे को सेट करने के लिए तेजस्वी यादव अपने एकमात्र मुशहर विधायक को कुर्बान करेंगे ? अगर राजद ने ऐसा किया तो इसका खामियाजा पड़ोस के कई विधानसभा क्षेत्रों में उठाना पड़ सकता है. राजद अपने एकमात्र मुशहर विधायक का टिकट काटकर उक्त सीट को पशुपति पारस को गिफ्ट में देने की जोखिम नहीं उठा सकता. ऐसे में पशुपति पारस का बेटे को विधायक बनाने का सपना अधूरा रह सकता है.

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1977 में पहली बार विधायक बने थे पारस

बता दें, पशुपति कुमार पारस अलौली विधानसभा सीट पर लंबे समय तक विधायक रहे हैं. इन्होंने पहला चुनाव 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर जीता था. हालांकि 1980 के विस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिश्री सदा से हार गए थे. पारस 1980 में लोकदल, 1990 से लेकर 2000 तक जनता दल से विधायक रहे. वर्ष 2000 में जनता दल यू के टिकट पर चुनाव जीते. वहीं 2005 का दोनों चुनाव लोजपा के टिकट पर लड़े और जीतकर विधायक बने. इसके बाद अलौली सीट इनके हाथ से निकल गया. 2010 में इस सीट से जेडीयू प्रत्याशी रामचंद्र सदा की जीत हुई थी. वहीं, 2015 के चुनाव में चंदन कुमार राजद के टिकट पर जीतकर विधायक बने.

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