लैंड फॉर जॉब केस में इस तारीख को आएगा फैसला, लालू-तेजस्वी समेत 99 लोग हैं आरोपी

रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया। पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर कोर्ट ने अपना फैसला 13 अक्टूबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई का दावा है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में नौकरियां देने के बदले जमीन हासिल की थी। सीबीआई ने लालू, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित 99 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप डी की अस्थायी नौकरियां जमीन के बदले दी गईं।

कोर्ट में क्या हुआ?
स्पेशल जज विशाल गोगने की कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक डीपी सिंह ने दावा किया कि उनके पास आरोपियों के खिलाफ चार्ज तय करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। दूसरी ओर, लालू प्रसाद के वरिष्ठ वकील मनींदर सिंह ने जोरदार तरीके से बचाव किया। उन्होंने कहा, ‘यह मामला पूरी तरह से सियासी साजिश है। कोई सबूत नहीं है कि नौकरियां जमीन के बदले दी गईं। जमीन खरीदने के लिए पैसे दिए गए थे और सभी लेन-देन पारदर्शी थे।’

‘न कोई सिफारिश, न कोई भ्रष्टाचार’
लालू के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि नौकरियों के लिए कोई नियम तोड़ा नहीं गया। उन्होंने कहा, ‘लालू प्रसाद ने किसी भी उम्मीदवार के लिए सिफारिश नहीं की। रेलवे के किसी भी जनरल मैनेजर ने यह नहीं कहा कि उनकी लालू से मुलाकात हुई।’ वकील ने यह भी जोड़ा कि सिर्फ लालू को ‘मास्टरमाइंड’ कहना काफी नहीं है, बिना सबूत के यह आरोप बेबुनियाद है।

राबड़ी देवी के वकील ने भी 28 अगस्त को दलील दी थी कि जमीन खरीदने के लिए राबड़ी ने पैसे दिए थे और यह कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा, ‘जमीन खरीदना और नौकरी देना, ये दो अलग-अलग मामले हैं। इनके बीच कोई संबंध नहीं है।’ सीबीआई ने अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं और अब कोर्ट 13 अक्टूबर को यह तय करेगा कि आरोपियों पर चार्ज तय होंगे या नहीं। इस मामले में 99 लोग आरोपी हैं और सभी की नजर कोर्ट के अगले कदम पर टिकी है। क्या यह मामला लालू परिवार के लिए नई मुश्किल खड़ी करेगा, या फिर वे इस बार भी सियासी तूफान से बच निकलेंगे? यह तो वक्त ही बताएगा।





