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बिहार में SIR के बीच फर्जी आवास सर्टिफिकेट बनाने वाले गैंग का खुलासा, सिर्फ ₹200 में हो रहा था खेल

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बिहार में जारी गहन मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच किशनगंज किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड के गंधर्वडांग थाना क्षेत्र के तलवारबंधा गांव में फर्जी तरीके से बनाए जा रहे जाली आवास प्रमाण पत्र के धंधे का पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा किया है। इस दौरान पुलिस ने तलवारबंधा गांव से ही अजय कुमार साह नाम के एक युवक को फर्जी आवास प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में कंप्यूटर दुकान से गिरफ्तार किया है। इस दौरान पुलिस ने दुकान से 20 संदिग्ध आवास प्रमाण पत्र, 4 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र सहित कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, प्रिंटर, भारतीय तथा नेपाली करेंसी समेत अन्य सामान भी जब्त किया गया है।

जाली निवास प्रमाण पत्र बनाने को लेकर भारत-नेपाल सीमा से सटे गांव तलवारबंधा में पुलिस की बड़ी कार्रवाई को लेकर किशनगंज एसपी सागर कुमार झा ने कहा कि पुलिस को सूचना मिली थी, कि फर्जी आवास प्रमाण पत्र बनाने का काम सीमावर्ती क्षेत्र में चल रहा है। जिसके बाद मामले को लेकर जब सिविल प्रशासनिक विभाग से मदद ली गई, दिघलबैंक राजस्व अधिकारी द्वारा यह प्रतिवेदित किया गया कि दिघलबैंक प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा उन्हें तलवारबंधा गांव की चार महिलायों के संदिग्ध आवास प्रमाण पत्र उपलब्ध कराये गये थे।

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जिसके जांच के बाद यह पाया गया कि वो विभाग द्वारा निर्गत नहीं किया गया है, और गलत तरीके से डिजीटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल फर्जी आवास प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह द्वारा किया गया है। जिसके बाद स्थानीय थाना तथा एसडीपीओ टू ठाकुरगंज मंगलेश कुमार के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम का गठन किया गया। जिसमें डीएसपी साइवर रविशंकर, प्रभारी डीआईओ जनमजय सिंहा सहित एसएचओ दिघलबैंक, एसएचओ पौआखाली, एसएचओ गंधर्वडांगा सहित अन्य पुलिस बल शामिल थे।

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तलवारबंधा गांव से फर्जी आवास प्रमाण पत्र बनाने वाले शख्स अजय कुमार साह को गिरफ्तार किया गया और पूछताछ में आरोपी ने यह कबूला है, कि उसने किसी व्यक्ति द्वारा उपलब्ध एक लिंक के माध्यम से पिछले एक माह के अंदर लगभग 100 फर्जी आवास प्रमाण पत्र बनाए हैं। और इसके लिए वो प्रति व्यक्ति 200 रूपये लेता था। एसपी सागर कुमार ने कहा कि पुलिस के पास लिंक तथा लिंक भेजने वाले की जानकारी है और पुलिस आगे अनुसंधान कर रही है तथा बहुत जल्द इसके पूरे गिरोह का पर्दाफाश होगा।

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