2008 में आया था एग्जाम रिजल्ट, 17 साल बाद मिलेगी दारोगा की नौकरी; हाई कोर्ट का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने दारोगा पद के 252 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 29 पन्नों के आदेश में बिहार सरकार को 6 सप्ताह में इनकी बहाली प्रक्रिया पूरा करने का आदेश दिया है। जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल की एकलपीठ ने 252 अभ्यर्थियों की तीन अर्जियों पर एक साथ सुनवाई करने के बाद गुरुवार को यह आदेश दिया। बिहार पुलिस में दारोगा (एसआई) के पदों पर भर्ती के लिए सालों पहले परीक्षा ली गई थी, जिसका रिजल्ट 2008 में जारी हुआ था। अब 17 साल बाद इन अभ्यर्थियों को नौकरी मिलेगी।
हाई कोर्ट ने कहा कि जिन 133 अभ्यर्थियों की बहाली सुप्रीम कोर्ट के आदेश से की गई है, उनकी तुलना में इन अभ्यर्थियों को अधिक अंक मिले हैं। यही नहीं, 2023 और 2024 में भी कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई है। ऐसे में ये सभी अभ्यर्थियों समानता के आधार पर नियुक्ति पाने के हकदार हैं।

दरअसल, विज्ञापन संख्या 704/2004 के आवेदकों की ओर से दाखिल अभ्यावेदन को अलग-अलग तारीखों पर पुलिस उप महा निरीक्षक (कार्मिक) के आदेश को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दायर की गई थी। पुलिस उप महा निरीक्षक (कार्मिक) ने सभी अभ्यावेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस पर विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि 133 अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नियुक्त किया गया है। इन्हें समानता के अधिकार का लाभ नहीं दिया जा सकता।

17 साल पहले जारी हुआ था एसआई भर्ती का रिजल्ट, कोर्ट में गया था मामला
बता दें कि 1510 सब इंस्पेक्टर की नियुक्ति के लिए बीएसएससी ने विज्ञापन संख्या 704/2004 जारी किया था। परीक्षा का परिणाम 30 मई 2008 को घोषित किया गया। सभी आवेदकों का चयन शारीरिक और लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर हुआ था। मॉडल प्रश्नों में कुछ गलतियां थीं, इसलिए परिणाम को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

आयोग ने एक विशेषज्ञ समिति से आंसर शीट की दोबारा जांच कराई थी। इस कारण चयनित 160 अभ्यर्थियों को हटाना पड़ा, लेकिन राज्य सरकार ने चयनित 160 अभ्यर्थियों को भी बनाए रखने का निर्णय लिया। इसी बीच आयोग को राज्य सरकार से सब इंस्पेक्टरों के 299 पदों पर नियुक्ति के लिए अधियाचना प्राप्त हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने यह परीक्षा नए सिरे से कराने का आदेश दिया और केवल उन्हीं आवेदकों को शामिल करने का आदेश दिया, जिन्होंने केस दायर किया था। 223 अभ्यर्थियों को शारीरिक परीक्षा के साथ लिखित परीक्षा में बैठने की स्वतंत्रता दी गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 28 नवंबर 2011 के आदेश से उन सभी आवेदकों को अनुमति दी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 8 मई 2018 के आदेश से 133 अभ्यर्थियों को केवल मेडिकल फिटनेस टेस्ट लेने का आदेश दिया। इसके बाद 133 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई। कोर्ट का कहना था कि नियुक्त 133 अभ्यर्थियों के अंतिम कट ऑफ अंकों से आवेदकों के मिले अंक अधिक हैं।


