राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाई कोर्ट से झटका लगा है। झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को चारा घोटाले में दोषी राजद प्रमुख लालू यादव की सजा बढ़ाने की मांग वाली सीबीआई की अपील स्वीकार कर ली। लालू यादव को देवघर कोषागार से जुड़े चारा घोटाला मामले में 89 लाख रुपये के गबन के लिए दोषी ठहराया गया था।
इस मामले में 5 अन्य को भी सीबीआई की एक विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था। दोषी ठहराए जाने वालों में बेक जूलियस, आरके राणा, फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद और सुबीर भट्टाचार्य शामिल थे। सभी दोषियों को साढ़े तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। साथ ही इन पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
अब सीबीआई ने लालू यादव के साथ ही जूलियस बेक और सुबीर भट्टाचार्य की सजा बढ़ाने की भी मांग की है। अन्य दोषियों आरके राणा, फूलचंद सिंह और महेश प्रसाद की साल 2018 में सजा सुनाए जाने के बाद मृत्यु हो गई थी।
सीबीआई का कहना है कि बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते लालू यादव के पास वित्त विभाग का प्रभार भी था। लालू यादव को पशु आहार और दवाओं के बढ़े हुए बिलों की आड़ में फर्जी निकासी की जानकारी थी। सीबीआई की और से की गई जांच के अनुसार, देवघर कोषागार से 89.27 लाख रुपये की निकासी हुई थी।
सीबीआई ने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई अपनी अपील में कहा है कि लालू यादव उस समय पशुपालन विभाग के प्रभारी भी थे।
सीबीआई के वकील दीपक भारती ने अपनी दलील में कहा कि जांच से पता चला है कि लालू यादव को देवघर कोषागार में हुई हेराफेरी की जानकारी थी। फिर भी निचली अदालत ने इस अपराध के लिए उनको केवल 3.5 साल की सजा सुनाई। इस अपराध में अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। सनद रहे जब यह कथित घोटाला सामने आया था तब झारखंड बिहार का हिस्सा हुआ करता था।
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