बिहार के पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। उरांव जाति के पांच लोगों को डायन बताकर पहले बेरहमी से पीटा गया और फिर उन्हें जिंदा जला दिया गया। इस जघन्य कांड में तीन महिलाएं और दो पुरुषों की जान गई है। मामला रजीगंज पंचायत के अंतर्गत मुफ्फसिल थाना क्षेत्र का है। वारदात के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अपने-अपने घरों में बंद हो गए हैं। लोगों में दहशत का माहौल है।
गांव में पसरा है सन्नाटा, पुलिस ने डाला डेरा
घटना की जानकारी मिलते ही एसपी, एसडीपीओ और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और पूरे गांव में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद शवों को छुपा दिया गया है, जिन्हें अब डॉग स्क्वाड और FSL टीम की मदद से खोजा जा रहा है। गांव में पुलिस कैंप कर रही है।
डरे सहमे इकलौते चश्मदीद ने खोली परतें
पीड़ित परिवार का एकमात्र जीवित सदस्य, 16 वर्षीय लड़का, डर के कारण अपने ननिहाल भाग गया था। उसने बताया कि पूरे गांव की संलिप्तता इस घटना में है और उसने चार मुख्य आरोपियों के नाम भी बताए हैं। पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
अंधविश्वास और झाड़फूंक बना हत्याकांड का कारण
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गांव में झाड़फूंक और टोने-टोटके के विवाद को लेकर ही इस घटना को अंजाम दिया गया। गांव का कोई भी व्यक्ति पुलिस को जानकारी देने को तैयार नहीं है, जिससे पुलिस को जांच में कठिनाई हो रही है।
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