अपने बर्थडे पर निशांत ने गरीबों को खिलाई खिचड़ी, खुद अपने हाथों से परोसा

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का आज जन्मदिन है। अपने बर्थडे पर निशांत ने अपने हाथों पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर के पास रहने वाले गरीबों को खिचड़ी खिलाई। इसे पहले सुबह-सुबह वो अपने जन्मदिन के मौके पर परिवार के सदस्यों के साथ पटना के महावीर पहुंचे थे। जहां निशांत ने भगवान भोले नाथ की पूजा की और उनका रुद्राभिषेक भी किया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा अपने बेटे निशांत की जन्मदिवस के अवसर पर महावीर मंदिर के बाहर दरिद्र नारायण भोज का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत अपने जन्मदिन परदेर शाम पटना के महावीर मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने दरिद्र नारायण भोज का आयोजन किया और गरीबों को अपने हाथ से खाना खिलाया। निशांत कुमार के साथ उनके परिवार की लोग भी मौजूद थे। निशांत कुमार के साथ उनके परिवार की लोग भी शामिल थे और वहां उन्होंने कई लोगों को अपने हाथ से खाना खिलाया और काफी देर तक रहे।

बता दें कि मुख्यमंत्री के बेटे निशांत का आज 44 वां जन्मदिवस है। आज सुबह ही उन्होंने महावीर मंदिर में जाकर वहां पूजा अर्चना की थी और हवन भी किया। निशांत के जन्मदिवस के अवसर पर उनकी माता हमेशा दरिद्र नारायण भोज का आयोजन करती थी उसी परंपरा को आज भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चला रहे हैं और अपने बेटे के जन्मदिवस के अवसर पर हर साल दरिद्र नारायण नारायण भोज का आयोजन करते हैं।

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेहत को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच निशांत ने पिता की तबीयत को लेकर सफाई दी थी और तभी से उनके सक्रिय राजनीति में आने की अटकलें तेज हो गई है। आज उनके जन्मदिन पर जदयू कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने पोस्टर लगाकर निशांत को बर्थडे की बधाई दी और राजनीति में उतरने की उम्मीद जताई है।

हालांकि निशांत ने अब तक अपनी सक्रिय राजनीति में एंट्री को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन पार्टी में यह माना जा रहा है कि वे जदयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वाभाविक उत्तराधिकारी बन सकते हैं। तभी तो पोस्टर में उन्हें कार्यकर्ताओं के द्वारा उनके मांगों को मानने के लिए धन्यवाद तक दे दिया गया है।
ज्ञात हो कि निशांत के समर्थकों में उनके राजनीति में एंट्री को लेकर उत्साह साफ दिख रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि निशांत कब अपनी राजनीतिक पारी की औपचारिक शुरुआत करते हैं और क्या इस पारी में वे अपने पिता के नक़्शे-कदम पर चल पाने में कामयाब होते हैं या फिर अपनी पहचान और राह खुद बनाते हैं।




