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1989 के दंगों में उजड़ा गांव बना बिहार का पहला स्मार्ट विलेज, इन आधुनिक सुविधाओं से है लैस

बिहार के बांका जिले के रजौन प्रखंड स्थित नवादा बाजार सहायक थाना क्षेत्र के नवादा-खरौनी पंचायत के बाबरचक गांव में राज्य का पहला स्मार्ट विलेज बन गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज बसंत पंचमी के दिन यानी रविवार 2 फरवरी 2025 को इसका औपचारिक उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्मार्ट विलेज में विभिन्न सुविधाओं का निरीक्षण किया और 9 करोड़ रुपये की लागत वाली योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इस ऐतिहासिक पहल से न केवल गांव के लोगों में बल्कि पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

1989 के दंगों के दौरान उड़ गया था गांव

बाबरचक गांव तीन दशक पहले तक घनी आबादी वाला क्षेत्र था, लेकिन 1989 के दंगों के दौरान यह पूरी तरह उजड़ गया था। इसके बाद यहां के निवासी मजबूरन अन्य स्थानों जैसे धोरैया प्रखंड के बलियास और भागलपुर जिले के अगरपुर-पीथना में बस गए। अब, इतने वर्षों बाद, इस उजड़े हुए स्थान पर स्मार्ट विलेज के निर्माण से स्थानीय ग्रामीणों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

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सड़क और बुनियादी सुविधाओं की थी कमी

रजौन के पूर्व प्रमुख और वर्तमान जिला परिषद सदस्य सुमन पासवान ने बताया कि करीब 15 साल पहले तक इस गांव तक पहुंचने के लिए कोई सड़क भी नहीं थी। ग्रामीणों को तीन किलोमीटर दूर नवादा बाजार में वाहन खड़ा कर गांव तक पैदल आना पड़ता था। लेकिन अब इस क्षेत्र में बिहार का पहला स्मार्ट विलेज तैयार होना गर्व की बात है।

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नवादा-खरौनी पंचायत की मुखिया आरती देवी ने कहा कि स्मार्ट विलेज की सुविधाओं का लाभ सिर्फ बाबरचक ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य ग्रामीण भी उठा सकेंगे। इससे इस उपेक्षित ग्रामीण क्षेत्र में विकास की एक नई राह खुलेगी।

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स्मार्ट विलेज में मिलेंगी ये सुविधाएं

बांका जिला प्रशासन द्वारा विकसित यह स्मार्ट विलेज ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक नवाचार है। इसमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की ‘पूरा’ (PURA – Providing Urban Amenities in Rural Areas) संकल्पना को साकार किया गया है।

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इस योजना के तहत 164 भूमिहीन गरीब परिवारों को तीन डिसमिल जमीन आवंटित की गई है। कुल 10 एकड़ 30 डिसमिल क्षेत्रफल में फैले इस गांव में उन्नत बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। यह वे परिवार हैं, जो रजौन प्रखंड के विभिन्न हिस्सों में सड़क किनारे झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे थे। इस स्मार्ट विलेज को एक टाउनशिप की तर्ज पर विकसित किया गया है।

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स्मार्ट विलेज में प्रमुख सुविधाएं

  • कुल 164 मकानों का निर्माण होना है, जिसमें पहले चरण में 65 मकान तैयार हैं और इन्हें लाभुकों को दिया गया।
  • प्रत्येक घर तक पक्की सड़क और जल निकासी व्यवस्था।
  • हर घर में नल से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित।
  • हर घर में स्मार्ट मीटर के साथ विद्युत कनेक्शन।
  • गलियों में 10 किलोवाट के एकीकृत सोलर पैनल से स्ट्रीट लाइटिंग।
  • मुख्य सड़क से गांव तक पक्की सड़क का निर्माण।

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अन्य बुनियादी सुविधाएं और विकास कार्य

  • 20 डिसमिल जमीन में मॉडल स्कूल, जहां पहली से पांचवीं कक्षा तक की शिक्षा मिलेगी।
  • 30 डिसमिल क्षेत्र में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, जिससे ग्रामीणों को मामूली बीमारियों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
  • 2.1 किमी लंबी आंतरिक सड़क, जो धोरैया और रजौन प्रखंडों को जोड़ेगी।
  • सभी घरों को ड्रेनेज सिस्टम से जोड़ा गया है।
  • पूरे गांव में सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं।
  • पीएचईडी विभाग की ओर से दो जल मीनारों और मिनी जलापूर्ति योजना के तहत घर-घर पानी पहुंचाने की व्यवस्था।
  • सामुदायिक भवन, मछली पालन और छठ घाट के लिए तालाब का निर्माण।
  • खेल मैदान, जिसमें फुटबॉल ग्राउंड, रनिंग ट्रैक, बास्केटबॉल और बैडमिंटन कोर्ट शामिल हैं।
  • सभी परिवारों को जीविका समूह से जोड़कर सतत आजीविका, पशुपालन, मत्स्यपालन और लघु उद्योगों से जोड़ा जा रहा है।

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ग्रामीण विकास का आदर्श मॉडल

इस स्मार्ट विलेज को ग्रामीण विकास का एक आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यहां के लोगों को आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस पहल से न केवल बाबरचक गांव बल्कि पूरे क्षेत्र का सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य बदलने की उम्मीद है।