Bihar

बिहार में महंगी हो सकती है जमीन, सरकार लेने वाली है बड़ा फैसला

बिहार में फ्लैट और जमीन के निबंधन (रजिस्ट्र) को लेकर निर्धारित किए जाने वाले जमीन की न्यूनतम मूल्य दर (एमवीआर) की समीक्षा शुरू हो गई है। इस बाबत जिलास्तर पर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके बाद निबंधन विभाग के स्तर पर समीक्षा कर राज्य सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा।

अगर राज्य सरकार की स्वीकृति मिलती है, तो नया दर अप्रैल 2025 से लागू हो सकता है। राज्य में आखिरी बार वर्ष 2016 में शहरी क्षेत्र में एमवीआर बढ़ाया गया था।

जमीन का रेट क्यों बढ़ सकता है?

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिलों में गठित मूल्यांकन समितियां बीते करीब एक दशक के आधार पर जमीन की प्रकृति में आए बदलाव को देखते हुए उसका एमवीआर तय करने में जुटी है। इसके लिए इस अवधि में उस क्षेत्र में हुई निबंधन की संख्या को भी आधार बनाया जा रहा है।

जिन इलाकों में निबंधन की संख्या अधिक बढ़ी है, उन क्षेत्रों के बाजार मूल्य और एमवीआर का अंतर देखा जाएगा। विकसित व विकासशील श्रेणियों में मुख्य सड़क, प्रधान सड़क, शाखा सड़क के बाजार मूल्य की अलग-अलग समीक्षा करते हुए एमवीआर तय किया जाएगा।

  • दरअसल, पिछले आठ-नौ सालों में जमीन की बाजार कीमतों में दोगुनी-तिगुनी वृद्धि हुई है, मगर एमवीआर यानी सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया है। इस बीच शहरी निकायों की संख्या दोगुनी हो गई है।
  • इसके अलावा, राज्य के सभी प्रमुख जिला मुख्यालयों वाले शहरों में आयोजना क्षेत्र यानी प्लानिंग एरिया भी बनाया गया है, जिसमें कई ग्रामीण इलाके शहरी क्षेत्र में शामिल हए हैं। ऐसे में इन इलाकों में जमीन की मांग और कीमतें दोनों में वृद्धि हुई हैं।

मूल्यांकन समितियों का मानना है कि वर्तमान में कई इलाकों में एमवीआर से कई गुणा अधिक कीमत पर जमीन की खरीद-बिक्री हो रही है, जिससे राजस्व की हानि हो रही है।

नहीं बढ़ा एमवीआर, फिर भी रिकॉर्ड राजस्व:

राज्य में एमवीआर न बढ़ाने के बावजूद जमीन-फ्लैट आदि के निबंधन से राज्य सरकार को इस साल रिकॉर्ड राजस्व की प्राप्ति हुई है। पिछले साल मध्य फरवरी तक करीब 5600 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ था। इस साल अभी तक 6700 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त हो चुका है।

यह अब तक निबंधन से मिला सर्वाधिक राजस्व है। इस वित्तीय वर्ष 2024-25 का लक्ष्य 7500 करोड़ निर्धारित किया गया है। अभी इसमें करीब डेढ़ माह का समय शेष है। विभाग का दावा है कि 31 मार्च तक आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।

Avinash Roy

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