Bihar

बिहार: पुलिसवालों ने बारातियों को धमका कर वसूले पैसे, दारोगा और होम गार्ड के जवान समेत 4 सस्पेंड, जेल

बिहार की राजधानी पटना में बारात से लौट रहे कार सवार चार लोगों को गौरीचक थाने की गश्ती गाड़ी ने रोककर पहले उनकी तलाशी ली, फिर रुपये की मांग कर डाली। दीदारगंज के कोठिया के रहने वाले जितेंद्र कुमार और उनके दोस्तों ने जब रुपये नहीं होने का हवाला दिया तो उन्हें गलत मामले में फंसाने की धमकी दी गई। इसके बाद डरे-सहमे पीड़ितों को पेट्रोल पंप पर ले जाया गया। फिर वहां स्कैनर के जरिये उनसे 25 हजार रुपये लिये गये। बाद में पुलिसवालों ने पेट्रोलपंप कर्मियों से नकद रुपये ले लिये।

किसी तरह मौके से निकलने के बाद अगले रोज दो नवंबर को पीड़ितों ने इसकी जानकारी पटना पुलिस के वरीय अधिकारियों को दी। इसके बाद गौरीचक थाने में 2019 बैच के दारोगा विवेक कुमार, दो होमगार्ड के जवान और एक निजी चालक प्रेम कुमार के खिलाफ जितेंद्र के बयान पर केस दर्ज किया गया। डीआईजी सह एसएसपी राजीव मिश्रा ने पुलिसवालों पर लगे संगीन आरोपों की जांच का जिम्मा सिटी एसपी पूर्व को सौंपा। इधर, जांच के दौरान जब आरोप सही निकले तो दारोगा सहित चारों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया।

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के मिले साक्ष्य

पुलिस अधिकारी जब पीड़ित की शिकायत के बाद पेट्रोल पंप पर गये और वहां तहकीकात की तो पता चला कि एक नवंबर की रात यहां रुपये का लेन-देन हुआ है। रुपये स्कैनर के जरिये लिये गए, लेकिन उसके बदले पेट्रोल नहीं दिया गया। स्कैनर पर भेजे गये रुपये के बदले पुलिसवालों ने पेट्रोल पंपकर्मियों से नकद ले लिये।

सूत्रों की मानें तो सीसीटीवी कैमरे में भी अहम साक्ष्य मिले हैं। पूरी तरह से आश्वश्त और आरोपों पर मुहर लगने के बाद पुलिस अधिकारियों ने आरोपित दारोगा समेत अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया।

निलंबित हुए, अब बर्खास्तगी का खतरा

डरा-धमकाकर रुपये वसूलने का मामला सामने आने और इस संबंध में केस दर्ज होने के बाद पुलिस कप्तान ने दारोगा को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही दोनों होमगार्ड के जवानों की सेवा समाप्ति को लेकर उनके अफसरों को पत्र लिखा गया है। इस मामले में दारोगा पर विभागीय कार्रवाई होगी। इसके बाद उसे बर्खास्त भी किया जा सकता है।

थानों में निजी चालकों का दबदबा

राजधानी के अधिकतर थानों में निजी चालकों की ड्यूटी लगाई जाती है। कई बार निजी चालक ही थाने में अहम रोल अदा करते हैं। थाने में किसी तरह की जरूरत को पूरा करने की कूवत भी निजी चालकों के पास रहती है। अवैध वसूली और गैरकानूनी धंधेबाजों से रुपये वसूलने में भी थानों के निजी चालक आगे हैं। कई बार आम लोग यह नहीं समझ पाते कि थाने की गाड़ी चलाने वाला पुलिसकर्मी है या कोई निजी चालक।

Avinash Roy

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