समस्तीपुर Town

नजर हर खबर पर…

BiharNEWS

जेंडर के आधार पर महिला कर्मी को प्राथमिकता कानून सम्मत नहीं, पटना हाइकोर्ट का बड़ा फैसला

IMG 20231027 WA0021

यहां क्लिक कर हमसे व्हाट्सएप पर जुड़े 

पटना हाइकोर्ट ने बालिका स्कूल में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी की महिला कर्मचारी की सेवा को जेंडर के आधार पर पुरुष कर्मचारी की तुलना में प्राथमिकता देने के विरुद्ध अपना निर्णय सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ महिला होने के आधार पर पुरुषों की तुलना में प्राथमिकता कानून सम्मत नहीं है. जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने इस मामलें पर सभी पक्षों को सुनने के बाद यह निर्णय दिया. कोर्ट ने पाया कि वैधानिक समर्थन के बिना रोजगार की मान्यता जेंडर जैसे बाह्य कारकों के बजाय वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर होनी चाहिए. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के पिता के स्वीकृत पद पर उसके वैध दावे को मान्यता देते हुए उनके बकाये वेतन और उनकी सेवानिवृत्ति की राशि सहित सभी बकाया सहित सभी मौद्रिक लाभों का भुगतान करे.

लिंग के आधार पर दी गयी थी प्राथमिकता

याचिकाकर्ता के पिता रामदेव यादव को 1982 में प्रोजेक्ट गर्ल्स हाइ स्कूल, आनंदपुर में चपरासी के रूप में नियुक्त किया गया था. रामदेव यादव की नियुक्ति स्वीकृत पद के विरुद्ध थी, लेकिन पद की अनुपलब्धता के आधार पर उनकी मान्यता खारिज कर दी गयी .इसके बजाय अस्वीकृत पद पर नियुक्त लालदेई देवी की सेवा को उनके लिंग के आधार पर प्राथमिकता दी गयी.कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के पिता रामदेव यादव ने 1982 से प्रोजेक्ट गर्ल्स हाइ स्कूल, आनंदपुर में दो स्वीकृत श्रेणी-IV पदों में से एक में लगातार चपरासी के रूप में काम किया था. लालदेई देवी को बाद में 1983 में अस्वीकृत पद पर नियुक्त किया गया था. फिर भी उनकी सेवा को केवल उनके लिंग के आधार पर प्राथमिकता दी गयी थी.

IMG 20241003 WA0063

IMG 20230604 105636 460

स्थापित मानदंडों का उल्लंघन

कोर्ट ने पाया कि लड़कियों के स्कूल में काम करने वाली महिला होने के कारण लालदेई देवी के पक्ष में प्राधिकारियों का फैसला मनमाना और सरकारी दिशा निर्देशों या समिति की सिफारिशों द्वारा समर्थित नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रबंध समिति, जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने याचिकाकर्ता के पिता की सेवा को वर्षों से लगातार मान्यता दी है. उनके स्पष्ट अधिकार के बावजूद उन्हें मान्यता देने से इनकार करने का निर्णय ऐसी नियुक्तियों के लिए स्थापित मानदंडों का उल्लंघन माना गया.

IMG 20240904 WA0139

कोर्ट ने अधिकारियों की इस गलती को वर्षों से ठीक करने में विफल रहने के लिए भी आलोचना की जिससे लालदेई देवी को मनमाने फैसले के आधार पर काम करना जारी रखने की अनुमति मिल गयी.कोर्ट ने कहा कि सेवा की मान्यता से जुड़े फैसले लिंग जैसे बाहरी कारकों के बजाय वस्तुनिष्ठ मानदंडों पर आधारित होने चाहिए. जब ऐसी वरीयता के लिए कोई वैधानिक आधार नहीं है.

Dr Chandramani Roy Flex page 0001 1 1 scaled

Samastipur Town Adv

IMG 20240414 WA0005

IMG 20230818 WA0018 02

20201015 075150