बिहार ने आईटी इंजिनियरिंग के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है. बिहार ने अपना सुपर कम्प्यूटर तैयार कर लिया है. एआई जैसी शक्ति से संपन्न इस सुपर कम्प्यूटर का नाम रखा गया है परम बुद्ध और इसे तैयार किया है पटना में मौजूद सीडैक (सेंटर फॉर डेवलपमेंटमें ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग) के पटना चैप्टर ने.
सीडैक के पटना चैप्टर ने बिहार का पहला सुपर कम्प्यूटर परम बुद्ध को तैयार करने की जानकारी देते हुए बताया कि परम बुद्धा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसजें (एआई) की शक्ति से लैस बेहद आधुनिक कम्प्यूटर है. इस एआई आधारित सुपर कम्प्यूटर बनाने के बाद बिहार देश के उन विकसित राज्यों और पटना उन विकसित शहरों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां इस तरह के कम्प्यूटर मौजूद हैं और उनसे विभिन्न तरह के कार्य भी हो रहे हैं. पुणे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर, बेंगबें लुरु, हैदराबाद समेत अन्य शहर इस श्रेणी में पहले से शामिल हैं.
4.5 करोड़ लागत ये बना है सुपर कम्प्यूटर
इस सुपर कम्प्यूटर को तैयार करने में 4 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत आई है. इसमें अन्य सुपर कम्प्यूटर से इतर ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) लगा है, जबकि अन्य में सीपीयू (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) होता है. जीपीयू की मदद से यह कई अलग-अलग तरह के कार्यों को एक साथ बिना किसी त्रुटि के कर सकता है. परम बुद्धा की अब तक कई क्षेत्रों में परीक्षण किया गया है और उनके परिणाम सकारात्मक और सटीक आये हैं. परम बुद्ध का सफलतापूर्वक उपयोग आईआईटी बीएचयू, थल सेना समेत अन्य कई महत्वपूर्ण स्थानों पर टेस्टिंग मोड में किया जा चुका है. सीडैक का दावा है कि परम बुद्धा ने अपनी सारी परीक्षा पास कर ली है और अब यह पूरी तरह से सेवा देने में सक्षम है. आईआईटी पटना में भी इसे लगाने की मांग आ रही है. जल्द ही इसे अधिकृत रूप से लॉन्च किया जाएगा.
शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिसिंग जैसे क्षेत्र में शोध होगा आसान
सीडैक, पटना के निदेशक आदित्य कुमार सिन्हा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि परम बुद्ध बिहार में तैयार किया गया पहला एआई आधारित सुपर कंप्यूटर है. कई पहलुओं पर टेस्टिंग में यह पूरी तरह सफल रहा है. इसकी मदद से शोध, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिसिंग समेत सभी अहम क्षेत्रों में कई जटिल कार्य भी आसानी से किए जा सकते हैं.
आनेवाले दिनों में परम बुद्ध की मदद से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े शोध को सरल तरीके से करने में मदद मिलेगी. खासकर जिन शोधों में बहुत बड़ी संख्या में डाटा को प्रोसेस कर परिणाम तक पहुंचने की कवायद जुड़ी हुई है, वहां इसका उपयोग सबसे महत्वपूर्ण साबित होगा. कृषि के क्षेत्र में फसलों में होने वाली बीमारियों और इसके इलाज के अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किसी बीमारी का प्रभाव या लंबे समय बाद किसी दवा के प्रयोग से पड़ने वाले असर का अध्ययन सुगमता पूर्वक किया जा सकता है.
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