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बिहार में शिक्षा विभाग 28 हजार नए नाइट गार्डों की करेगा बहाली, स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार; इतनी मिलेगी सैलरी

बिहार में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक एक ओर जहां सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत हैं, वहीं उनके फैसले से कई युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। अब शिक्षा विभाग की ओर से राज्य के 28 हजार से अधिक मध्य विद्यालयों में रात्रि प्रहरी की सेवा लेने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत स्थानीय युवाओं को हर महीने पांच हजार रुपये मानदेय मिल सकेगा।

करीब 6 हजार स्कूलों में पहले से रात्रि प्रहरी की व्यवस्था

शिक्षा विभाग की ओर से जारी संकल्प में कहा गया है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पर्याप्त बेंच-डेस्क की आपूर्ति, बल्ब-पंखों की व्यवस्था, पेयजल के लिए मोटर पंप, मध्याह्न भोजन के लिए थालियां और बर्तन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लैब, टीवी स्मार्ट बोर्ड और कंप्यूटर की व्यवस्था की गई है। इन स्कूलों में सृजित संपत्तियों की सुरक्षा का कारगर व्यवस्था नहीं है। हालांकि 5921 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में रात्रि प्रहरी की व्यवस्था पहले से चली आ रही है। इन रात्रि प्रहरियों को अंशकालिक तौर पर स्थानीय प्रधानाध्यापक और स्कूल प्रबंध समिति की ओर सेरखा गया। इन्हें प्रति महीने पांच हजार रुपये की दर से मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 3818 माध्यमिक स्कूलों में आईसीटी लैब स्थापित किया गया है, जिसमें रात्रि प्रहरी की व्यवस्था उसी एजेंसी के माध्यम से की गई है, जिसकी ओर से कंप्यूटर लगाया गया है। इन्हें 10 हजार रुपए प्रति माह उन्हें मानदेय दिया जाता है। इसके तहत यदि कोई कंप्यूटर चोरी होता है, तो उस एजेंसी का यह जिम्मा है कि वह चोरी हुई कंप्यूटर को अपने खर्चे पर पुनः स्थापित करें।

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वर्तमान में 28201 स्कूलों में रात्रि प्रहरी की कोई व्यवस्था नहीं

वर्तमान में मध्य विद्यालयों में रात्रि प्रहरी की कोई व्यवस्था नहीं है। राज्य में कुल मध्य विद्यालय 29019 है, केवल उन्हीं मध्य स्कूलों में रात्रि प्रहरी एजेंसी की ओर से रखा गया, जहां आईसीटी लैब की स्थापना की गई है,ऐसे स्कूलों की संख्या 889 है। जबकि शेष 28201 स्कूलों में रात्रि प्रहरी की कोई व्यवस्था नहीं है। अब इन स्कूलों में भी रात्रि प्रहरी की आवश्यकता महसूस की गई है, क्योंकि अधिकांश स्कूलों में पर्याप्त उपस्कर, स्मार्ट क्लास, बेंच डेस्क, पंखे, बर्तन और अन्य सामग्रियां है।

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शिक्षा विभाग की ओर से साफ किया गया है कि मध्य विद्यालयों में लगाए जाने वाले रात्रि प्रहरी की सेवा अंशकालिक होगी और इसके लिए एकमुश्त मानदेय का भुगतान किया जाएगा। सभी स्कूलों में हाउस कीपिंक एजेंसियों की ओर से स्कूलों में शौचालयों और परिसर की साफ-सफाई के लिए सफाई कर्मी रखे गए हैं। इसके लिए एजेंसियों को एक सफाई कर्मी के साथ दो-तीन स्कूलों से संबद्ध किया गया है। इसलिए यह सलाह दी गई है कि सफाई कर्मी को जिन स्कूलों में साफ-सफाई का जिम्मा दिया गया है, उसमें से किसी एक मध्य विद्यालय में रात्रि प्रहरी के रूप में रखा जाए। इससे न केवल स्कूल को रात्रि प्रहरी मिल जाएगा, बल्कि अत्यंत गरीब वर्ग से आने वाले एक सफाई कर्मी को पांच हजार रुपये अतिरिक्त रूप से प्राप्त हो सकेंगे।

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पुरुष रसोईयां को भी रात्रि प्रहरी के रूप में रखने की अनुमति

एमडीएम योजना के तहत स्कूलों में कार्यरत पुरुष रसोईयां को भी अंशकालिक रात्रि प्रहरी के रूप में रखने की अनुमति प्रदान की गई है। लेकिन यह ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है कि जिन स्कूलों में पुरुष रसोईया को अंशकालिक रात्रि प्रहरी के रूप में चिह्नित किया जाएगा, उन स्कूलों में हाउसकीपिंग एजेंसी के सफाई कर्मी को यह जिम्मा नहीं दिया जाएगा। लेकिन यह भी साफ कर दिया गया है कि चयनित रात्रि प्रहरी को उनके गांव में अवस्थित मध्य स्कूलों में कार्य करने की अनुमति नहीं होगी। रात्रि प्रहरी के रूप में हाउसकीपिंग एजेंसियों की ओर से एक वर्दी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी पहचान सहज हो सके।

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चोरी या सुरक्षा में चूक होने पर एजेंसी को करना होगा भुगतान

रात्रि प्रहरी के सेवा के दौरान स्कूल में किसी भी प्रकार की चोरी या सुरक्षा में चूक होने पर सारी जिम्मेवारी संबंधित एजेंसी की होगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी संबंधित एजेंसी के मासिक बिल से चोरी हुए सामान के समतुल्य मूल्य की कटौती की जाएगी और कटौती की गई राशि से चोरी हुई सामान की प्रतिपूर्ति की जाएगी। राज्य में 5921 माध्यमिक स्कूलों में पूर्व से रात्रि प्रहरी की व्यवस्था है, जिनमें रात्रि प्रहरी स्कूल प्रबंध समिति की ओर से रखे गए है, फिर भी सामान चोरी होने की शिकायतें प्राप्त हुई है। ऐसे में यह उचित प्रतीत होता है कि इन रात्रि प्रहरियों की भी सेवाएं उन्हीं हाउसकीपिंग एजेंसी के माध्यम से ली जाए, ताकि संबंधित एजेंसी यह जिम्मा ले सके कि यदि कोई सामान चोरी होता है, तो उसकी भरपाई एजेंसी के मासिक बिल से की जा सकेगी।

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