बिहार में इस महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की ओर से सीट शेयरिंग लगभग फाइनल हो गई है। विधायकों की संख्या के आधार पर आरजेडी के खाते में दो सीटें जाना तय है। वहीं, तीसरी सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार को उतारा जाएगा। महागठबंधन में शामिल लेफ्ट पार्टी सीपीआई माले ने तीसरी सीट पर अपना दावा ठोका था। मगर आरजेडी और कांग्रेस ने उसे एमएलसी चुनाव में एक सीट देने की बात कही है। बिहार विधान परिषद की 11 सीटों पर भी आगामी दिनों में चुनाव होने वाले हैं।
बिहार की 6 राज्यसभा सीटों पर 27 फरवरी को चुनाव हैं। इनमें से तीन सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की जीत तय है, जिनमें बीजेपी से दो और जेडीयू से एक सांसद बनाया जाएगा। वहीं, महागठबंधन के खाते में तीन सीटें आएंगी। महागठबंधन के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक आरजेडी ने दो और कांग्रेस ने एक सीट पर अपने सांसद बनाने पर सहमति दे दी है। ऐसे में उनकी सहयोगी पार्टी सीपीआई माले को निराशा हाथ लगी है।
माले ने कुछ हफ्ते पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से एक राज्यसभा सीट देने की इच्छा जाहिर की थी। कयास लगाए गए कि माले अपनी पार्टी के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य को राज्यसभा भेजना चाहती है। हालांकि, आरजेडी और कांग्रेस ने इस मांग को दरकिनार कर, माले को एमएलसी चुनाव में एक सीट देने का वादा किया है।
आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि माले ने राज्यसभा की एक सीट की मांग की थी। मगर इस बार आरजेडी और कांग्रेस 6 में से तीन सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। माले को एमएलसी की एक सीट दी जाएगी। आगामी विधान परिषद के चुनाव में आरजेडी और कांग्रेस अपने वोटों को जोड़कर माले को एक सीट पर जीत दर्ज कराएगी।
सूत्रों के मुताबिक महागठबंधन में राज्यसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा हो तय हो गया है। इसकी आधिकारिक घोषणा 12 फरवरी के बाद की जाएगी, इस दिन बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए की नई सरकार का फ्लोर टेस्ट होना है। राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो चुकी है। नामांकन करने की आखिरी तारीख 15 फरवरी है।
राज्यसभा चुनाव में विधायक वोट करते हैं। बिहार विधानसभा में महागठबंधन के विधायकों की संख्या 114 है। इस तरह महागठबंधन आसानी से तीन सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है। मौजूदा चुनावी समीकरणों के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 35 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है।
बताया जा रहा है कि आरजेडी से पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मौजूदा सांसद मनोज झा का राज्यसभा जाना लगभग तय है। लालू की पार्टी दूसरी सीट पर किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मौका दे सकती है। इस सीट से अभी अहमद अश्फाक करीम सांसद हैं, जो कटिहार की अलकरीम युनिवर्सिटी के संस्थापक हैं।
आरजेडी एक एक अन्य नेता ने बताया कि राज्यसभा की एक सीट से अल्पसंख्यक समाज का प्रतिनिधित्व है। ऐसे में फिर से इस सीट पर किसी मुस्लिम नेता को ही उतारा जाएगा। यह पार्टी के परंपरागत वोटबैंक के अनुरूप भी होगा। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि लालू परिवार से किसी सदस्य को भी राज्यसभा भेजा जा सकता है।
वहीं, कांग्रेस से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह का नाम चर्चा में है। अखिलेश अभी राज्यसभा सांसद हैं और वे रिटायर होने वाले हैं। पार्टी उन्हें दोबारा संसद भेज सकती है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी ही तय करेगी कि राज्यसभा किसे भेजना है।
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