बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और सुर्खियों रहने वाले आईएएस अधिकारी केके पाठक छुट्टी पर चले गए हैं। एससीएस केके पाठक 14 जनवरी तक छुट्टी पर रहेंगे। उन्होंने छुट्टी लेने की वजह भी बता दिया है। कहा है कि स्वास्थ्य कारणों से वे छुट्टी पर जा रहे हैं। सुपर एक्टिव अफसर केके पाठक अवकाश पर जाने से कई तरह की चर्चा हो रही है। केके पाठक बीपीएससी शिक्षकों के बीच काफी लोकप्रिय है। आजकल निरीक्षण के दौरान उन पर फूलों की बारिश कर आरती उतारी जाती है।
केके पाठक के छुट्टी पर जाने के बीच यह बताना जरूरी है कि 13 जनवरी को बिहार सरकार द्वारा पटना के गांधी मैदान में नवनियुक्त बीपीएससी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र का वितरण किया जाएगा। छुट्टी पर जानेके बाद केके पाठक इस वितरण समारोह में मौजूद नहीं रहेंगे। पटना के गांधी मैदान में 25 हजार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा जबकि पूरे बिहार के सभी जिलों में कुल मिलाकर 95 हजार शिक्षकों को नौकरी की चिट्ठी दी जाएगी। पटना में सीएम नीतीश कुमार अपने हाथों से नौकरी बांटेंगे। बिहार सरकार के कार्यक्रम से ठीक पहले केके पाठक ने 13 जनवरी के एक दिन बाद 4 जनवरी तक छुट्टी ले लिया है। इसे लेकर लेकर प्रशासनिक महकमे खासकर शिक्षा विभाग में गहनगामी बढ़ गई है।
केके पाठक जब से शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बनाए गए तब से लगातार दौरा कर रहे हैं। दिन तो दिन वे रात में भी निरीक्षण पर निकल जाते हैं। बिहार के सभी जिलों का उन्होंने दौरा किया स्कूलों में जाकर पठन पाठन की व्यवस्था का जायजा लिया। केके पाठक की मेहनत का असर बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर असर भी दिख रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति देखी जा रही है तो छात्र छात्राओं की उपस्थिति में काफी सुधार हुआ है। लापरवाही बरतने वाले सैंकड़ों शिक्षकों पर केके पाठक अभी तक कार्रवाई कर चुके हैं। इतना ही नहीं लाखों की संख्या में छात्रों के नाम भी स्कूलों से कट चुके हैं जिनका फर्जी तरीके से दाखिला कराया गया था।
केके पाठक तब खास तौर पर चर्चा में आए जब उनका टकराव अपने विभाग के मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखऱ से हो गया। उन्होंने शिक्षा मंत्री के आप्त सचिव को विभाग में आने से रोक दिया क्योंकि उनकी ओर से केके पाठक के खिलाफ पीत पत्र लिखे गए। केके पाठक का राजभवन से भी टकराव हुआ जब वे उच्च शिक्षा के केंद्र विश्वविद्यालयों की व्यवस्था में दखल देना शुरू कर दिया। उन्होंने कई कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ एक्शन ले लिया तो राजभवन की नाराजगी उन्हें झेलना पड़ा। विश्वविद्यालय के वित्तीय संचालन में केके पाठक ने दखल दिया। इतना ही नहीं उन्होंने एमएलसी के भत्ते पर भी रोक लगा दिया जिसके बाद उन्हें हटाने के लिए मुहिम चलाई गई।
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