मोइनुल हक स्टेडियम में भले ही मैच की वापसी हो गई हो, चौके छक्कों की बरसात शुरू हो गई हो, लेकिन बिहार क्रिकेट बोर्ड (बीसीए) का विवाद अभी तक शांत नहीं हुआ है. इसका जीता जागता सबूत बिहार-मुंबई रणजी मुकाबले के पहले दिन देखने को मिला और विवाद खुलकर सामने आ गया. एक तरफ जहां बिहार और मुंबई की टीम मैदान में खेल रही थी. वहीं दूसरी तरफ स्टेडियम के बाहर बीसीए के ओएसडी पर जानलेवा हमला हो गया.
हमले में ओसडी का सिर फोड़ दिया गया. बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी ने इस हमले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दोषी व्यक्ति की पहचान कर उनके ऊपर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि वे दोबारा ऐसी घटना को अंजाम देने के बारे सोचें भी नहीं.
क्यों हुआ हमला?
दरअसल, मैच शुरू होने के एक दिन पहले बीसीए की तरफ से दो टीमों का ऐलान किया गया. एक बीसीए अध्यक्ष की तरफ से वहीं दूसरी बर्खास्त सचिव की तरफ टीम की लिस्ट जारी की गई थी. जब पूर्व सचिव की टीम मैच खेलने पहुंची तो उसे स्टेडियम में एंट्री नहीं मिली. काफी बहस बाजी के बाद पुलिस ने उन्हें बस में बैठाकर स्टेडियम से बाहर कर दिया.
इसके कुछ देर के बाद कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर से मैच के व्यवस्था में लगे बीसीए के ओएसडी मनोज कुमार पर जानलेवा हमला कर दिया. मनोज कुमार के साथ मारपीट हुई और उनके सिर को पत्थर मार फोड़ दिया गया. बताया जा रहा है कि इस घटना को पूर्व सचिव के द्वारा बनाई गई टीम के सदस्यों ने अंजाम दी है. बीसीए अध्यक्ष ने कहा कि कुछ लोग बिहार क्रिकेट की साख को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जायेगा.
दो टीम का हुआ था ऐलान: अध्यक्ष पक्ष (जो मैच खेल रही) –
आशुतोष अमन (कप्तान), साकिबुल गनी (उपकप्तान), विपिन सौरभ (विकेटकीपर), बाबुल कुमार, सचिन कुमार सिंह, वैभव सूर्यवंशी, हिमांशु सिंह, रवि शंकर, रिषभ राज, नवाज खान, विपुल कृष्णा, आकाश राज, बलजीत सिंह बिहारी, सरमन निगरोध, वीर प्रताप सिंह.
पूर्व सचिव पक्ष –
इंद्रजीत कुमार (कप्तान), अपूर्व आनंद (उपकप्तान), विकाश रंजन (विकेटकीपर), शशीम राठौड़, समर कुदारी, कुमार मृदुल, कुमार रजनीश, शशि आनंद, लाखन राजा, यशस्वी ऋषभ, प्रतीक कुमार, विक्रांत सिंह, हिमांशु हरि, शशि शेखर, वेदांत यादव, अभिनव कुमार, कमलेश कुमार सिंह, विश्वजीत गोपाला, प्रशांत श्रीवास्तव, दीपक राजा.
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