बिहार के पूर्व सांसद एवं बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। गोपालगंज के डीएम रहे जी कृष्णैय्या की पत्नी उमा ने शीर्ष अदालत में यह याचिका दायर की थी। जी कृष्णैय्या की हत्या के आरोप में आनंद मोहन को आजीवन कारावास हुई थी। इसी साल नीतीश सरकार ने जेल नियमावली में संशोधन किया, जिसके बाद आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई का रास्ता साफ हुआ। अगर सुप्रीम कोर्ट रिहाई के आदेश को गलत करार देती है तो आनंद मोहन के दोबारा जेल जाने की नौबत आ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार सुबह आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। इससे पहले 26 सितंबर को हियरिंग की तारीख थी, मगर उस दिन सुनवाई नहीं हो पाने से इसे टाल दिया गया था। उससे पहले 11 अगस्त को शीर्ष अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई थी। उस समय कोर्ट ने नीतीश सरकार से पूछ था कि आनंद मोहन के साथ कितने और दोषियों को नियमों में छूट देकर समय से पहले जेल से रिहा किया गया, जो लोकसेवकों की हत्या के दोषी थे।
शीर्ष अदालत ने नीतीश सरकार से इस पर एडिशनल एफिडेविट फाइल करने के निर्देश दिए थे। माना जा रहा है कि सरकार की ओर से अदालत में जवाब दाखिल कर लिया गया होगा। अब कोर्ट इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है।
बता दें कि आनंद मोहन की रिहाई के बाद तत्कालीन डीएम जी कृष्णैय्या के परिवार वालों ने जमकर विरोध जताया था। उनकी पत्नी उमा कृष्णैय्या ने कहा था कि नीतीश सरकार ने उनके पति की हत्या के दोषी को रिहा करके उनके साथ अन्याय किया है। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। फिर सुप्रीम कोर्ट में रिहाई के आदेश के खिलाफ याचिका फाइल की।
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