बिहार सरकार ने शिक्षकों को डराया: नई नियमावली का विरोध करना पड़ेगा भारी, धरना-प्रदर्शन करनेवालों पर होगी कार्रवाई
सरकार ने नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली बनाई। इसके बाद से शिक्षकों का आंदोलन चल रहा है। पटना के आईएमए हॉल में बड़ा सम्मेलन भी किया गया। बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन कई संगठनों ने मिल कर किया। कई बार धरना-प्रदर्शन भी दिया गया।
बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। लेकिन, अब सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए पत्र जारी कर दिया है। सोमवार को बीपीएससी के चेयरमैन अतुल प्रसाद ने कहा है कि कुछ ही दिनों में बीपीएससी शिक्षक बहाली के लिए वैकेंसी आ जाएगी। मंगलवार को सरकार ने शिक्षकों को डराने वाला फरमान जारी किया है।

पत्र में दी गई है ये धमकी-
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक और सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी करते हुए कहा है कि ‘समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से यह समाचार प्रकाशित होते रहते हैं कि वर्तमान स्थानीय निकाय के शिक्षकों द्वारा नई नियुक्ति नियमावली के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

इस संबंध में सुनिश्चित करें कि यदि कोई भी स्थानीय निकाय के नियोजित शिक्षक अथवा अन्य कोई भी सरकारी कर्मी नियुक्ति नियमावली के विरोध में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन या अन्य सरकार विरोधी कार्यक्रमों में भाग लेते हैं तो उनके विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई अविलंब सुनिश्चित की जाए।’
लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश-शिक्षक नेता
पत्र जारी होने के बाद टीईटी-एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहा है कि ‘ शिक्षा विभाग से जारी यह पत्र लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास है। शांतिपूर्ण तरीके से, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार हर किसी को है। एक तो सरकार शिक्षकों की मांग वादा करके पूरी नहीं कर रही है, दूसरी तरफ शिक्षकों पर दबाव बना रहे हैं कि वे धरना में शामिल नहीं हों।

सरकार शिक्षकों को जानबूझ कर उग्र कर रही है। समाजवादियों और कम्युनिस्टों की सरकार से जनता ऐसी उम्मीद नहीं करती है। जयप्रकाश नारायण के विचारों पर चलने वाली सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है। शिक्षक संघ तो महागठबंधन के घोषणा पत्र की मांग को ही पूरी करने की मांग कर रहे हैं।’





