बिहार के सासाराम में हुई हिंसा मामले में बीजेपी के पूर्व विधायक जवाहर प्रसाद की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। सोमवार को सासाराम सीजेएम कोर्ट ने पू्र्व विधायक की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया। वहीं पुलिस ने इस मामले में धारा 302 संकलित करने की कोर्ट से अपील की थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। बता दें कि जवाहर प्रसाद अभी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।
जवाहर प्रसाद सासाराम विधानसभा क्षेत्र का 5 बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 1990 में वह पहली बार विधायक बने थे। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में सासाराम सीट जेडीयू के पास जाने से इन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया था। रामनवमी जुलूस के बाद हुई हिंसा को भड़काने के आरोप में पुलिस ने 29 अप्रैल को जवाहर प्रसाद को गिरफ्तार किया था।
गौरतलब है कि सासाराम हिंसा मामले में अब तक चार प्राथमिकी दर्ज करायी गई हैं। मामले में 65 आरोपित गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे। वहीं पिछले दिनों कोर्ट ने 37 आरोपितों को जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया था। हालांकि जमानत में अदालत की शर्तों ने सबको चौंकाया था। अधिकांश लोग इसे दो गुटों में हुए विवाद को मिटाने की पहल के रूप में भी देख रहे हैं।
बता दें कि पिछले दिनों एसपी विनीत कुमार ने बताया था कि पूर्व विधायक के आपराधिक इतिहास रहे हैं और अनुसंधान में उनकी संलिप्तता पाए जाने के बाद ही गिरफ्तारी की गई है। ऐसे में पुलिस उनसे क्या राज उगलवाना चाहती है, यह तो बात में पता चलेगा।
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