Bihar

MBBS छात्र खुद से नहीं दे सकेंगे मरीजों को दवा और सलाह, NMC ने जारी कीं गाइडलाइंस

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सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के विद्यार्थी किसी भी मरीज को खुद से दवा और जांच की सलाह नहीं दे सकेंगे। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रोफेशनल रिस्पांसब्लीटिस गाइडलाइन जारी की है। इसमें विद्यार्थियों को हिदायत दी गई है कि वह मरीजों की स्क्रीनिंग के समय उन्हें दवा या जांच की सलाह नहीं दें। अगर किसी मरीज को किसी दवा की सलाह देनी है तो मेडिकल छात्र अपने सीनियर डॉक्टर से पूछें और उसके बाद मरीज का इलाज के बारे में बताएं।

मेडिकल कॉलेजों में चौथे वर्ष के विद्यार्थियों को मरीजों की स्क्रीनिंग भी सिखाई जाती है। एनएमसी ने विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों के लिए भी प्रोफेशनल गाइडलाइन जारी की है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विकास कुमार ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन के निर्देशों का कॉलेज में पालन कराया जाएगा।

सोशल मीडिया पर भी मरीज की जानकारी शेयर नहीं करेंगे छात्र :

मेडिकल के छात्र अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर किसी भी मरीज की जानकारी को शेयर नहीं कर सकेंगे। एनएमसी ने इस पर भी रोक लगा दी है। कमीशन ने कहा कि मरीज की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर करने से उनके मन पर बुरा असर पड़ता है। एनएमसी ने एसकेएमसीएच समेत सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया है वह अपने यहां के छात्रों को स्थानीय बोली की पढ़ाएं ताकि उन्हें मेडिकल पास करने के बाद मरीजों का इलाज करने में कोई परेशानी नहीं हो।

विद्यार्थियों को स्वास्थ्य शिविरों में जाने का दिया गया निर्देश :

मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को स्वास्थ्य शिविरों में जाने का निर्देश एनएमसी ने दिया है। अपनी नई गाइडलाइन में उसने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि वह अपने यहां पढ़ रहे मेडिकल के विद्यार्थियों को कम्युनिटी हेल्थ सर्विस में भाग लेने को कहें और उनकी ड्यूटी उसमें लगाएं। किसी भी आपदा या किसी भी बड़ी घटना के बाद इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टर के साथ विद्यार्थियों की भी ड्यूटी लगाई जाए, ताकि वे सीनियर से इलाज के तरीकों को जान सकें।

प्रोफेसर अब बनेंगे फ्रेंड, फिलॉस्फर और गाइड :

विद्यार्थियों के साथ एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किया है। मेडिकल कॉलेज के शिक्षक विद्यार्थियों के लिए सिर्फ प्रोफेसर नहीं बल्कि फ्रेंड, फिलास्फर और गाइड की भूमिका में रहेंगे। कमीशन ने कहा है कि मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसरों को छात्रों के चिकित्सकीय नैतिक मूल्यों के बारे में बताना होगा। मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों को बताना होगा डॉक्टर और मरीज के बीच किस तरह से बातचीत होगी। शिक्षकों को छात्रों के सामने रोल मोडल बनना होगा।

विद्यार्थी खुद को भी रखेंगे फिट :

एनएमसी ने अपने दिशा-निर्देश में कहा है कि विद्यार्थी खुद को भी शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखें। वे किसी भी नशे की लत से दूर रहेंगे और योग करें। इसके अलावा कॉलेज में होने वाले करिकुलर एक्टिविटी में भी खुद को शामिल करें। मेडिकल छात्र अध्यात्म में भी अपना मन लगाएंगे।

Avinash Roy

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