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बिहार में पीली रेत के लिए हो रही मारामारी, सफेद बालू के नहीं मिल रहे खरीदार, जानें क्या है कारण

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बिहार में सफेद बालू के खरीदार नहीं मिल रहे. जबकि पीले बालू (बोलचाल की भाषा में लाल बालू) को लेकर होड़ मची है. पीला बाबू सरकार का खजाना भी भर रहा और ठेकेदारों की जेबें भी भारी कर रहा. दूसरी तरफ, कई जिलों में सफेद बालू की बंदोबस्ती के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह पीले बालू की ज्यादा मांग और पीला व सफेद बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए एक समान दर होना है.

कहां मिलते हैं कैसे बालू 

दक्षिण बिहार के 18 जिलों की नदियों में पीला बालू, जबकि 17 जिलों में सफेद बालू पाये जाते हैं. शेखपुरा, अररिया और कटिहार जिलों में बालू नहीं है. गंगा नदी के उत्तरी भाग के जिलों में सफेद बालू उपलब्ध है. इसका उपयोग मुख्यतः भराई कार्यों में किया जाता है. वहीं पीला बालू वाले जिलों की बंदोबस्ती क्षमता सफेद बालू जिलों से भिन्न है, क्योंकि निर्माण कार्य में पीला बालू की मांग अधिक है, जबकि भराई कार्य के लिए सफेद बालू की मांग सीमित है.

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पांच नदियों से होता है पीले बालू का खनन

राज्य में पीले बालू का खनन पांच नदियों- सोन, फल्गु, चानन, मोरहर और किउल से होता है. बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा 15 जिलों में ई-नीलामी के माध्यम से बंदोबस्तधारियों का चयन कर पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पीले बालू का खनन हो रहा है. इससे फरवरी 2023 तक सरकार को 664.18 करोड़ रुपये का राजस्व मिला. इन 15 जिलों में पटना, भोजपुर, औरंगाबाद, रोहतास, गया, जमुई, लखीसराय, सारण, अरवल, बांका, बेतिया, वैशाली, मधेपुरा, किशनगंज और बक्सर शामिल हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राज्य में हो रही बालू घाटों की नीलामी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य में नये सिरे से बालू घाटों की नीलामी हो रही है. फिलहाल विभिन्न जिला समाहर्ता द्वारा 254 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है. इससे सरकार को बंदोबस्ती की करी 2710.37 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है. वहीं अग्रधन के रूप में करीब 652.74 करोड़ रुपये मिल चुके हैं.

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दोनों बालू की दर समान, पर गुणवत्ता में अंतर

राज्य में पीला और सफेद बालू के घाटों की बंदोबस्ती के लिए समान दर करीब 75 रुपये प्रति घनमीटर तय है. ऐसे में पीला बालू की मांग अधिक रहने से उसके बालू घाटों की बंदोबस्ती तो तुरंत हो जाती है. वहीं सफेद बालू की मांग कम रहने से उसके घाटों की बंदोबस्ती नहीं हो पाती है. जिला स्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद सफेद बालू घाटों की बंदोबस्ती की दर का पुनर्निधारण होता है.

फल्गु नदी : छह बार टेंडर निकला, नहीं पहुंचे ठेकेदार

तीन साल पहले एनजीटी ने फल्गु नदी से बालू निकासी पर रोक लगा दी थी. अक्तूबर, 2022 में हाइकोर्ट के निर्देश पर बालू घाट की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई. नवंबर, 2022 से लेकर अब तक खनन विभाग की ओर से फल्गु नदी से बालू की निकासी के लिए बालू घाट की नीलामी के लिए छह बार टेंडर निकाला गया है. लेकिन, किसी ने टेंडर में हिस्सा नहीं लिया. जिला खनन पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि फल्गु नदी में बालू बचा ही नहीं है. इस कारण कोई ठेकेदार टेंडर नहीं डालता है.

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भागलपुर : चार नदियों के छह बालू घाटों का फिर होगा टेंडर

ठेकेदारों द्वारा रुचि नहीं लिये जाने के कारण खान व भूतत्व विभाग भागलपुर जिले के छह बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए फिर से टेंडर निकालेगा. इसमें चानन नदी का ब्लॉक-एक, दो व तीन, गेरुआ का यूनिट दो, अंधरी नदी का यूनिट एक व कोसी नदी का यूनिट एक शामिल है. मंगलवार को गेरुआ का यूनिट-थ्री का टेंडर फाइनल हुआ है. यानी, अबतक भागलपुर जिला के अंतर्गत चार नदियों के नौ बालू घाटों में तीन बालू घाट का टेंडर फाइनल हुआ है. बाकी के आधा दर्जन के लिए अब नये सिरे से टेंडर निकाल कर बंदोबस्ती की जायेगी.

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